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विनोबा भावे के आश्रम में रोज हजारों चिट्ठियां आती थी, एक दिन गांधीजी ने भी उ्न्हें पत्र लिखा, लेकिन विनोबा भावे ने उसे फाड़कर फेंक दिया, उन्होंने ऐसा क्यों किया?

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