रिटर्न कितना मिलेगा इसमें इन्वेस्टर बिहेवियर की होती है बड़ी भूमिका
यूटिलिटी डेस्क. ऐसे कई कारण हैं जिनसे निवेश पर मिलने वाला रिटर्न प्रभावित होता है। इन्हीं में से एक है इन्वेस्टर बिहेवियर। यह ऐसी वजह है जिस पर शायद हमारा सबसे कम ध्यान जाता है। इन्वेस्टर बिहेवियर को मापा नहीं जा सकता है, लेकिन यह निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को तय करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। हम यहां निवेशकों के कुछ ऐसे ही व्यवहार का जिक्र कर रहे हैं जो उनके रिटर्न को प्रभावित करता है..
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मुनाफा कमाने और इसमें स्थिरता बनाए रखने के लिए लंबी अवधि के लिए निवेश में बने रहना जरूरी है, खासकर जब आप शेयरों में निवेश करने जा रहे हों। यदि आप लंबी अवधि के लिए शेयरों में निवेश करते हैं तो अच्छा मुनाफा कमाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। लेकिन बाजार में समय-समय पर आने वाली गिरावट के दौरान निवेशक अपने शेयर बेच देते हैं। इससे उन्हें या तो कम रिटर्न मिलता है या फिर नुकसान उठाना पड़ता है। यहां यह समझना जरूरी है कि बाजार में समय-समय पर गिरावट आती रहती है।
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निवेश और भावनाएं दोनों साथ-साथ नहीं होना चाहिए। मसलन, यह जानते हुए कि महंगाई रिटर्न को प्रभावित करती है कई निवेशक अभी भी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे फिक्सड रिटर्न इन्स्ट्रूमेंट्स में अपना पैसा रखने को तरजीह देते हैं। उनका यह मानना होता हे भले रिटर्न कम मिले, लेकिन पैसा सुरक्षित रहना चाहिए।
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अक्सर निवेशक ऐसे लोग जो पहले मुनाफा कमा चुके हों उन्हें देखकर निवेश करने लगते है। यदि कोई सफल निवेशक किसी खास एसेट क्लास में निवेश करता है तो दूसरे भी उसी एसेट क्लास में निवेश करने लगते हैं। सुनी-सुनाई बातों पर निवेश करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि हर व्यक्ति के वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता अलग-अलग होती है।
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अक्सर लोग अपने निवेश को लेकर निश्चिंत रहते हैं। उन्हें लगता है कि उनका अपनी वित्तीय स्थिति पर बेहतर नियंत्रण है। लेकिन कभी-कभी ऐसा भ्रम के कारण भी हो सकता है। लंबी अवधि में इसका विपरीत प्रभाव आपकी वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है। ध्यान रखें बाजार में उतार-चढ़ाव आना इसकी एक विशेषता है। इसलिए निवेश में हमेशा एक जैसे नियम-कायदों का पालन नहीं करना चाहिए।
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अक्सर लोग निवेश को लेकर रिश्तेदारों-परिचितों से राय लेते हैं। उनका मानना होता है कि रिश्तेदारों-परिचितों से मिली राय से उनका फायदा ही होगा। राय लेने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन उस पर आंख बंद कर निवेश करना खतरनाक भी हो सकता है। यह न सिर्फ आपके रिटर्न, बल्कि वित्तीय स्थिति को भी बिगाड़ सकता है। अंत में, निवेश के फैसलों और भावनाओं के बीच द्वंद्व कोई असामान्य बात नहीं है। फिर भी अपने स्वभाव तटस्थ रखते हुए, लंबी अवधि के लिए निवेश में बने रहना चाहिए। वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नियमित अंतराल पर निवेश की रणनीति में बदलाव करते हुए अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करते रहना चाहिए।
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