मेडिक्लेम कराने से पहले बीमा कंपनी को मेडिकल रिकॉर्ड की लें पूरी जानकारी
यूटिलिटी डेस्क. लगातार बढ़ते मेडिकल खर्च को देखते हुए मेडिक्लेम पॉलिसी जल्द से जल्द ले लेने में ही समझदारी है। यह आपकी जेब पर पड़ने वाले भार को कम करने में मदद करता है। बहुत से लोग मेडिक्लेम या हेल्थ इंश्योरेंस लेने को पैसे की बर्बादी मानते हैं, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार मेडिकल इमरजेंसी के मामले में 80 फीसदी केस पैसे की दिक्कत की वजह से बिगड़ जाते हैं। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि मेडिक्लेम लेते वक्त किन बातों का ध्यान रखा जाए।
- मेडिक्लेम लेने से पहले उसकी शर्त को ध्यान से समझें। मौजूदा वक्त् में ऑनलाइन पोर्टल पर तुलना करने की और सभी कंपनियों के प्लान की डीटेल जानकारी उपलब्ध है।
- जितनी जल्दी कवर लेंगे उतना कम प्रीमियम चुकाना पड़ेगा। युवाओं को आमतौर पर बीमारियां कम होती हैं। इस लिहाज से बीमा देने वाली कंपनियां उनके लिए प्रीमियम कम रखती हैं। बाद में इसे रीन्यू करते रहने से नो क्लेम बोनस का लाभ भी मिलता है।
- बीमा कंपनी को मेडिकल रिकॉर्ड के बारे में सही जानकारी दें। गलत जानकारी पर कंपनी आपको क्लेम देने से मना कर सकती है, जिससे इलाज के दौरान आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
- हर बीमा कंपनी के अपने नियम होते हैं और उस हिसाब से वह कंपनी पॉलिसी डिजाइन करती है। पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें क्या बातें या बीमारी शामिल नहीं है।
- ऐसी पॉलिसी लें जिसे जीवन में किसी भी समय रीन्यू कराया जा सके। हेल्थ कवर का उद्देश्य बड़ी उम्र में बीमारियों के इलाज पर आने वाले खर्च से वित्तीय सुरक्षा है, इसका ध्यान रखें।
- लिमिट/सब लिमिट वाला प्लान ना लें अस्पताल में कमरे के किराए की सीमा जैसी लिमिट से बचें। यह आपके हाथ में नहीं है कि आपके इलाज के दौरान आपको किस कमरे में रखा जाए। खर्च के लिए स्वास्थ्य बीमा कंपनी द्वारा कोई सब लिमिट तय किया जाना आपके लिए ठीक नहीं है।
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