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शनिवार को पितृमोक्ष अमावस्या, घर के बाहर रंगोली बनाएं और पितरों के लिए धूप-ध्यान करें

जीवन मंत्र डेस्क। शनिवार, 28 सितंबर को पितृ पक्ष का अंतिम दिन है। इस दिन आश्विन मास की अमावस्या है। शनिवार को अमावस्या होने से इसे शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। इस दिन कुटुंब के सभी मृत लोगों के लिए श्राद्ध कर्म करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनिवार की अमावस्या का विशेष महत्व है। इस योग में पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। स्नान के बाद दान-पुण्य करना चाहिए। आश्विन मास की अमावस्या को सर्व पितृमोक्ष अमावस्या कहा जाता है। यहां जानिए इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...

  • पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि पर सुबह जल्दी बिस्तर त्याग देना चाहिए। जल्दी उठकर स्नान करें और स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे का उपयोग करें। पितर देवताओं का स्वागत करने के भाव से घर के बाहर रंगोली बनाएं।
  • घर में जिस जगह पर पितरों के लिए धूप-ध्यान करना है, वहां गंगाजल छिड़के, गाय के गोबर से लीपकर उस जगह को पवित्र करें। घर में गौमूत्र का छिड़काव करें।
  • पितरों के नाम पर धूप-ध्यान करने के लिए शुद्ध सात्विक भोजन बनाएं। खीर-पुड़ी और सब्जी बना सकते हैं।
  • अमावस्या पर ब्राह्मणों को घर में बैठाकर भोजन कराने की परंपरा है। इसके लिए एक दिन पहले ही ब्राह्मणों को घर आने के लिए आमंत्रण देना चाहिए।
  • ब्राह्मण को घर में बैठाकर आदरपूर्वक भोजन कराएं। खाने के बाद दान-दक्षिणा दें।
  • ब्राह्मण की उपस्थिति में पितरों के लिए विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध कर्म करना चाहिए। गोबर के कंडे जलाकर उस पर गुड़-घी डालकर धूप देना चाहिए। पितरों को याद करना चाहिए।
  • पितरों के नाम लेकर जलते हुए कंडे पर दूध, दही, घी और खीर अर्पित करें।
  • खाना बनाते समय गाय, कुत्ता, कौआ के लिए थोड़ा खाना अलग रखें। ये खाना घर के बाहर गाय, कुत्ता और कौओं के लिए रखें।


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