अध्यक्ष सौरव को टी-20 मोड पर खेलना होगा
खेल डेस्क. करीब 30 महीने पहले जस्टिस आरएम लोढ़ा ने बीसीसीआई प्रशासन को भंग किया था और अब जाकर अगले हफ्ते बीसीसीआई को नया प्रशासन मिलेगी। जस्टिस लोढ़ा का फैसला आने के बाद कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (सीओए) अस्तित्व में आया था। सीओए से कहा गया था कि वे 6 से 8 महीने में बीसीसीआई में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक चुनाव कराएं। ये समय बढ़ते-बढ़ते काफी ज्यादा हो गया। हालांकि इस बीच सीओए के भी तमाम व्यवहार और फैसलों पर सवाल उठते रहे। ये पूरा समय भारतीय क्रिकेट की प्रतिष्ठा के लिए अच्छा नहीं रहा।
अब एक ओर सीओए के समीकरण से बाहर होने से कई लोगों ने राहत की सांस ली होगी। वहीं सीओए की नियुक्ति से अब बीसीसीआई का नया प्रशासन तय होने तक जिस तरह से चीजें हुई हैं, उससे शायद ही जस्टिस लोढ़ा खुश हों। बीसीसीआई के जो भी पदाधिकारी चुने गए हैं, उनमें से अधिकतर निर्विरोध चुने जा रहे हैं। ये बात बोर्ड के चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ताकत को यकीनन कम कर रही है, लेकिन जस्टिस लोढ़ा को जो बात इससे भी ज्यादा परेशान कर रही होगी, वो ये कि ज्यादातर पदाधिकारी किसी न किसी घराने से ही निकलकर आ रहे हैं।
‘सौरव का पद पर कार्यकाल 10 महीने का ही होगा’
जिन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया था, वो पीछे के दरवाजे से और अप्रत्यक्ष रूप से फिर बोर्ड में दखल देने की पोजीशन में आ चुके हैं। खैर इस बीच दो बदलाव सबसे बड़े रहे- इंडियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन (आईसीए) का गठन और सौरव गांगुली का बीसीसीआई अध्यक्ष बनना। आईसीए पर बात किसी और दिन होगी। आज बात सौरव पर। सौरव का पद पर कार्यकाल 10 महीने का ही होगा। इसके बाद उन्हें तीन साल के कूलिंग पीरियड पर जाना होगा, लेकिन इस छोटे कार्यकाल में भी उनसे तमाम उम्मीदें हैं।
‘सौरव आईसीसी की टेक्निकल कमेटी का भी हिस्सा रहे हैं’
लोढ़ा कमेटी ने भी कहा था कि बोर्ड में पदों पर आने के लिए पूर्व क्रिकेटरों से बेहतर कोई नहीं हो सका। फिर प्रशासक के तौर पर सौरव की खूबियां किसी से छिपी नहीं हैं। वे लंबे समय तक मैदान पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पिछले 4-5 साल से वे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल में अलग-अलग पदों पर रहे हैं। सौरव आईसीसी की टेक्निकल कमेटी का भी हिस्सा रहे हैं। बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर भी वे अपनी प्राथमिकताएं जता चुके हैं।
‘सौरव के पास पद पर समय कम है और काम बहुत ज्यादा’
टीम के आईसीसी टूर्नामेंट जीतने, आईसीसी से फ्यूचर टूर प्रोग्राम पर बात करने, पिंक बॉल क्रिकेट पर फैसला लेने की दिशा में सौरव जल्द ही कोई कदम उठा सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि घरेलू खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और वित्तीय सुरक्षा देना उनकी बड़ी प्राथमिकता है। सौरव के पास पद पर समय कम है और काम बहुत ज्यादा। यानी उन्हें यहां टी20 मोड पर ही बैटिंग करनी होगी।
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