अजय यौद्धा नहीं था रावण, श्रीराम से पहले शिवजी के अलावा 3 अन्य यौद्धाओं से हार चुका था रावण
जीवन मंत्र डेस्क। मंगलवार, 8 अक्टूबर को दशहरा है। त्रेता युग में इस तिथि पर श्रीराम ने रावण का वध किया था। श्रीराम से पहले भी रावण 4 बार युद्ध हार चुका था। रावण शिवजी, राजा बलि, वानर बालि और सहस्त्रबाहु अर्जुन से युद्ध में हार चुका था। जानिए इनसे जुड़े प्रसंग...
- शिवजी से युद्ध करने पहुंचा रावण
रावण स्वयं को सबसे शक्तिशाली मानता था। उसे इस बात का घमंड था। अपनी ताकत के नशे में एक बार वह शिवजी से युद्ध करने कैलाश पर्वत पहुंच गया। उस समय शिवजी ध्यान में बैठे थे। रावण ने शिवजी को युद्ध के लिए ललकारा, लेकिन महादेव ध्यान ही बैठे रहे। क्रोधित होकर रावण कैलाश पर्वत उठाने लगा, तब शिवजी ने अपने पैर के अंगूठे से ही कैलाश का भार बढ़ा दिया। रावण कैलाश के भार को उठा नहीं सका और उसका हाथ पर्वत के नीचे दब गया। इस हार के बाद रावण ने शिवजी को अपना गुरु बनाया और क्षमा याचना की।
- राजा बलि से युद्ध करने पहुंचा रावण
दैत्यराज बलि पाताल में रहते थे। तीनों लोकों को जीतने की कामना से रावण राजा बलि से युद्ध करने के लिए पाताल पहुंच गया। उस समय बलि के महल में कुछ बच्चे खेल रहे थे, उन्हीं बच्चों ने रावण को पकड़कर बांध दिया था।
- वानर बालि से युद्ध करने पहुंचा रावण
रावण ने वानरराज बालि के बारे में सुना की वह बहुत शक्तिशाली है तो वह बालि से युद्ध करने पहुंच गया। बालि उस समय पूजा कर रहा था। रावण ने उसे को ललकारा तो बालि ने उसे अपनी बाजू में दबा कर चार समुद्रों की परिक्रमा करने लगा। रावण ने बालि से स्वयं को आजाद कराने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा। पूजा के बाद बालि ने रावण को छोड़ दिया। इसके बाद रावण ने बालि से मित्रता कर ली।
- सहस्त्रबाहु अर्जुन से युद्ध करने पहुंचा रावण
सहस्त्रबाहु अर्जुन के एक हजार हाथ थे। इसी कारण उसका नाम सहस्त्रबाहु अर्जुन पड़ा। एक बार रावण सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंचा। उस समय सहस्त्रबाहु ने अपने हजार हाथों से नर्मदा नदी के बहाव को रोका और थोड़ी देर बाद पानी छोड़ दिया। नर्मदा के तेज बहाव में रावण बह गया। इस तरह यहां भी रावण की हार हुई।
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