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प्रकृति की उपासना का पर्व, नदियों और तालाब किनारे की जाती है सूर्यदेव की पूजा

जीवन मंत्र डेस्क. छठ पूजा वास्तविक रूप में प्रकृति की पूजा है। इस अवसर पर सूर्य भगवान की पूजा होती है, जिन्हें एक मात्र ऐसा भगवान माना जाता है जो प्रत्यक्ष हैं यानी दिखते हैं। अस्तलगामी भगवान सूर्य की पूजा कर यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि जिस सूर्य ने दिन भर हमारी जिंदगी को रौशन किया उसके निस्तेज होने पर भी हम उनका नमन करते हैं। छठ पूजा के मौके पर नदियां, तालाब, जलाशयों के किनारे पूजा की जाती है जो सफाई की प्रेरणा देती है। यह पर्व नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की प्रेरणा देता है। इस पर्व में केला, सेब, गन्ना सहित कई फलों की प्रसाद के रूप में पूजा होती है जिन से वनस्पति की महत्ता रेखांकित होती है।

  • भगवान सूर्य की बहन हैं छठ देवी

सूर्योपासना का यह पर्व सूर्य षष्ठी को मनाया जाता है, लिहाजा इसे छठ कहा जाता है। यह पर्व परिवार में सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि छठ देवी भगवान सूर्य की बहन हैं, इसलिए लोग सूर्य की तरफ अर्घ्य दिखाते हैं और छठ मैया को प्रसन्न करने के लिए सूर्य की आराधना करते हैं। ज्योतिष में सूर्य को सभी ग्रहों का अधिपति माना गया है। सभी ग्रहों को प्रसन्न करने के बजाय अगर केवल सूर्य की ही आराधना की जाए और नियमित रूप से अर्घ्य (जल चढ़ाना) दिया जाए तो कई लाभ मिल सकते हैं।

छठ पूजा का कैलेंडर

  1. छठ पूजा नहाय-खाए (31 अक्टूबर)
  2. खरना का दिन (1 नवम्बर)
  3. छठ पूजा संध्या अर्घ्य का दिन (2 नवम्बर)
  4. उषा अर्घ्य का दिन (3 नवम्बर)


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Chhath Puja 2019 Date Chhath Puja Nahay Khaay Chhath Puja 31 October To 3 November 2019


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