गुरुवार को एकादशी और द्वादशी का योग, विष्णुजी के साथ ही महालक्ष्मी और गाय की पूजा का पर्व
जीवन मंत्र डेस्क। गुरुवार, 24 अक्टूबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि रहेगी। एक ही दिन ये दोनों तिथियां आने से गुरुवार को भगवान विष्णु के साथ ही लक्ष्मी और गौमाता की विशेष पूजा करनी चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। द्वादशी को गौवत्स द्वादशी कहा जाता है। रमा देवी लक्ष्मी का ही एक नाम है। इसीलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही लक्ष्मीजी की भी पूजा की जाती है। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है। जानिए इस शुभ योग में कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं...
- गुरुवार को स्नान के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की पूजा करें। एकादशी व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से देवी-देवताओं का अभिषेक करें। शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और भगवान को स्नान कराएं।
- पूजा में महालक्ष्मी को लाल चीजें जैसे- लाल गंध, लाल कपड़े, लाल चूडि़यां, लाल फूल अर्पित करें। पीली कौड़ी, गौमती चक्र भी अवश्य रखें। पूजा में प्रसाद के लिए खीर रखें। भगवान विष्णु को पीले वस्त्र चढ़ाएं। महालक्ष्मी मंत्र का जाप करें-
- विष्णुप्रिये नमोस्तुभ्यं नमोस्तुभ्यं जगद्वते, आर्तहंत्री नमोस्तुभ्यं समृद्धं कुरु में सदा।
- नमो नमोस्तु महामाये श्रीपीठे सुर पूजिते, शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी: नमोस्तुते।
- इस मंत्र के साथ ही देवी लक्ष्मी के मंत्र ऊँ श्रीं श्रियै नम: का जाप कम से कम 108 बार करें।
- मंत्र जाप के बाद कर्पूर और दीपक जलाकर आरती करें। भगवान से पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा याचना करें। पूजा के बाद प्रसाद स्वयं भी लें और अन्य भक्तों को भी वितरीत करें।
- इसी दिन गौवत्स द्वादशी भी है। इसीलिए लक्ष्मी-विष्णु की पूजा के बाद किसी गाय को हरी घास खिलाएं। अगर संभव हो सके तो किसी गौशाला में धन का और घास का दान करें।
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