आराम वाले काम को छोड़कर जोखिम लेने के बाद ही कोई बड़ी सफलता मिल सकती है
जीवन मंत्र डेस्क। एक पुरानी प्रचलित कथा के अनुसार एक राजा अपने पड़ोसी राज्य में यहां घूमने गया। पड़ोसी राजा ने खूब अच्छी तरह मेहमान राजा की मेजबानी की। कुछ दिन वहां रहने के बाद राजा अपने राज्य में लौटने लगा तो पड़ोसी राजा ने उसे दो सुंदर कबूतर उपहार में दिए।
- राजा उन दोनों कबूतरों के लेकर अपने महल में आ गया। वहां एक सेवक को कबूतरों की देखभाल में नियुक्त कर दिया। सेवक सुबह-शाम कबूतरों के लिए दाना-पानी का इंतजाम कर देता। कुछ दिन बाद जब राजा उन कबूतरों का हाल जानने पहुंचा।
- सेवक ने बताया कि एक कबूतर तो बहुत ऊंचाई तक उड़ता है, लेकिन दूसरा पेड़ की एक शाखा पर ही बैठा रहता है। ये जानकर राजा को बहुत दुख हुआ कि दूसरा कबूतर उड़ क्यों नहीं रहा है।
- राजा ने तुरंत अपने मंत्रियों को बुलवाया, लेकिन कोई भी ये नहीं समझ पा रहा था कि दूसरे कबूतर को क्या हुआ है।
- तभी किसी ने राजा को सलाह दी कि पक्षियों के जानकार को बुलवाना चाहिए। मंत्रियों ने तुरंत ही एक गरीब को किसान को बुलवा लिया।
- किसान पक्षियों का जानकार था, उसने कबूतर के आसपास का क्षेत्र देखा और जिस पेड़ की शाखा पर वह बैठा रहता था, वह शाखा ही काट दी।
- इसके बाद दूसरा कबूतर भी आसमान में बहुत ऊंचाई तक उड़ने लगा। किसान ने राजा को बताया कि ये कबूतर इस शाखा के मोह में फंसा हुआ था, उड़ने की जोखिम लेने से डरता था, जब ये शाखा ही काट दी गई तो उसके पास उड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। इस कारण वह अब ऊंचाई तक उड़ने लगा है। ये देखकर राजा प्रसन्न हो गया और उसने किसान स्वर्ण मुद्राओं से सम्मानित किया।
कथा की सीख
इस कथा का मूल संदेश ये है कि जो लोग जोखिम लेने से डरते हैं, अपने आराम वाले काम को छोड़ना नहीं चाहते, वे ऊंचाई तक उड़ नहीं सकते यानी कोई सफलता नहीं हासिल कर पाते हैं। अगर आप भी कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो जोखिम लेना पड़ेगी।
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