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होम लोन प्रीपेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, कम होगा ब्याज का बोझ

यूटिलिटी डेस्क. ईएमआई का विकल्प लोन लेने वाले के फैसले पर 15 से 20 वर्ष तक दिया जा सकता है। लोन धारक के पास यह अधिकार रहता है कि वह चाहे तो बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान कर लोन अकाउंट समय पूर्व बंद कर सके। सभी प्रोसेस से गुजरने के बाद आपका लोन मंजूर हो जाता है। जिससे घर खरीद रहे हैं, उसे बैंक भुगतान कर देता है। इसके बाद आपको घर में रहने की अनुमति मिल जाती है।

यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि घर की रजिस्ट्री तो आपके नाम होती है, लेकिन घर का असली मालिक लोन खत्म होने तक बैंक ही रहता है। यही कारण है कि घर की रजिस्ट्री, पजेशन, एनओसी समेत सभी मूल दस्तावेजों की फाइल बैंक के अधीन रखना पड़ती है। लोन राशि खत्म होने पर आपको 'नो ड्यूज' का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। उसके बाद मूल दस्तावेज की फाइल आपको सौंप दी जाती है। हर फाइनेंस कंपनी की यही प्रक्रिया होती है। यह भी ध्यान में रखें कि किसी भी महीने किस्त चूकने न पाए। ज्यादा किस्तें चूकने पर बैंक आप पर जुर्माना कर सकता है, एक सीमा के बाद आपको घर से बेदखल भी किया जा सकता है। इस बार हम आपको प्रीपेमेंट, पुराने घर पर लोन तथा नो ईएमआई के बारे में बताएंगे।

  1. कोई भी बैंक या फाइनेंसर कंपनी 25-30 वर्ष से अधिक पुराने घर पर लोन देने से परहेज करती है। यदि लोन दे भी दिया तो घर का बीमा करवाना जरूरी होता है, वहीं लोन लंबी अवधि के लिए नहीं मिलता। इस कारण आपको कम अवधि का अधिक राशि का लोन लेना पड़ेगा। इससे आपकी महीने की किस्त ज्यादा आएगी।

    • वैसे अपने होम लोन को गति देने के लिए बैंक पुराने घरों की मरम्मत, अतिरिक्त निर्माण आदि के लिए लोने देने लगे हैं। पुराने घरों पर रिस्क के चलते कुछ बैंक इस कैटेगरी के लोन पर अधिक ब्याज ले सकते हैं।
  2. अगर आप तय अवधि से पहले होम लोन चुकाना चाहते हैं तो इसे प्रीपेमेंट कहते हैं। इसमें आपके द्वारा जमा की गई राशि सीधे मूलधन से जुड़ती है।

    • उदाहरण के लिए आपने 10 लाख का लोन 15 वर्ष के लिए लिया है और हर साल प्रीपेमेंट द्वारा आप इसे 10 वर्ष में खत्म कर देते हैं। ऐसे में आप पांच वर्ष का ब्याज भरने से बच जाते हैं। क्योंकि आपने जो भी अग्रिम राशि जमा की है, वह सीधे प्रिंसिपल अमाउंट में जुड़ती है।
    • मूलधन और ब्याज के रूप में आप सालाना तीन लाख रुपए तक की रकम पर इनकम टैक्स में छूट भी पाते हैं। जब बैंक ब्याज बढ़ा देते हैं, तब यह स्कीम आपके लिए और फायदेमंद हो जाती है।
    • प्रीपेमेंट पर पहले पेनल्टी लगा करती थी। लेकिन अब रिजर्व बैंक ने कहा है कि कोई ग्राहक होम लोन का प्रीपेमेंट करना चाहता है तो उससे कोई प्रीपेमेंट पेनाल्टी न ली जाए।
  3. इस स्कीम में डेवलपर या बिल्डर और ग्राहक के बीच एक करार होता है। इसमें पजेशन मिलने तक ग्राहक के बदले बिल्डर, बैंक को आपके होम लोन का ब्याज भरता है।

    • इसमें बैंक को तो फायदा है ही, बिल्डर को भी अपना प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए बैंक से नकदी मिलती रहती है और उसके मकान ज्यादा बिकते हैं। इन सब का फायदा ग्राहक को होता है।


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      प्रतीकात्मक फोटो


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