सेहत के लिए जरूरी है 'ई-फास्टिंग', इससे सोशल मीडिया की लत हो सकती है दूर
यूटिलिटी डेस्क. 'ई-फास्टिंग' यानी इलेक्ट्रॉनिक फास्टिंग। ये शब्द आपने शायद पहले भी सुना होगा। फास्टिंग का अर्थ है उपवास यानी किसी वस्तु से कुछ समय के लिए दूरी बना लेना। फास्टिंग यानी उपवास का सामान्य अर्थ होता है भोजन से कुछ समय के लिए स्वयं को दूर रखना। वहीं जब इंटरनेट, मोबाइल या सोशल मीडिया की बात आती है तो इससे कुछ समय के लिए दूर रहने को 'ई-फास्टिंग' कहते हैं।
इसका उद्देश्य, स्वयं को सोशल मीडिया की लत से धीरे-धीरे दूर करना है। मोबाइल हमें लोगों से जोड़कर रखता है और आपातकालीन स्थिति में मदद करता है। ऐसे में मोबाइल से दूरी नहीं बनाई जा सकती है लेकिन सोशल मीडिया से बनाई जा सकती है। अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप, कम्प्यूटर से अनावश्यक एप या अन्य अनुपयोगी सामग्रियों को हटाना भी, ई-फास्टिंग है। तकनीक का उचित समय पर उचित तरीक़े से प्रयोग ही ई-फास्टिंग का उद्देश्य है।
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यह स्वयं निर्धारित करें कि कहां सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करना है। गाड़ी चलाते समय, सड़क पर चलते समय, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर या परिवार के साथ होने पर सोशल मीडिया से दूर रहना तो उचित है ही, हर समय मोबाइल लेकर बैठ जाने से भी ख़ुद को रोकें।
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एक दिन सोशल मीडिया से दूरी बनाने का तय करें। कुछ देर परेशानी होगी लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत हो जाएगी। अगर एक दिन बिना सोशल मीडिया के बिता सकते हैं तो धीरे-धीरे दिन बढ़ाएं। अपने अंदर का ये बदलाव आप ख़ुद महसूस करेंगे।
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सोशल मीडिया के उपयोग का एक निश्चित समय तय करें। इसके लिए टाइम-टेबल बना सकते हैं। ख़ासतौर पर अॉफिस में इससे दूरी रखें। इसपर जितना समय बिताएंगे आपका काम उतनी ही देरी से पूरा होगा। बच्चों के सामने भी इसका कम इस्तेमाल करें। बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं। इससे उन्हें दूर रखने के लिए फोन का उपयोग कम करें। कोशिश करें की बेडरूम और डायनिंग टेबल तक सोशल मीडिया न पहुंचे।
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सेटिंग में जाकर सोशल मीडिया या अन्य एप का नोटिफिकेशन बंद कर दें। कई बार इनकी रिंग की वजह से फोन चेक करने बैठ जाते हैं और समय कब निकल जाता है पता ही नहीं चलता है। ऐसी एप्स जिनका उपयोग करना आवश्यक नहीं है उनका नोटिफिकेशन ऑफ कर दें जैसे सोशल मीडिया या मैसेंजर। एप डिलीट कर दें और इनकी वेबसाइट का उपयोग करें। वेबसाइट पर जाने से पहले आप कई बार सोचेंगे।
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सोशल मीडिया से हटकर एक और आदत है वीडियो गेम की। इसकी इतनी लत लग जाती है कि जगह देखे बिना कहीं भी गेम खेलने में जुट जाते हैं। मोबाइल से बातचीत ही करें उसे वीडियो गेम खेलने का उपकरण न बनाएं। अगर खलने का शौक़ भी है तो एक समय तय करें।
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छुट्टी के दिन सोशल मीडिया से भी छुट्टी लें। ये दिन शरीर और आंखों को आराम देने के लिए होता है। कहीं घूमने जाएं या दोस्तों से मिलें। इससे दूर रह कर दिमाग़ को विश्राम दें।
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