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19 नवंबर को कालभैरव अष्टमी, इस दिन करें भैरव भगवान के अलग-अलग स्वरूपों की विशेष पूजा

जीवन मंत्र डेस्क। मंगलवार, 19 नवंबर को कालभैरव अष्टमी है। मान्यता है कि प्राचीन समय में इसी तिथि पर शिवजी ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार सृष्टि की रचना सत्व, रज और तम इन तीन गुणों से मिलकर हुई है। शिव पुराण में बताया गया है कि शिवजी हर कण में विराजमान हैं, इस वजह से शिवजी ही इन तीन गुणों के नियंत्रक माने गए हैं। शिवजी को आनंद स्वरूप में शंभू, विकराल स्वरूप में उग्र और सत्व स्वरूप में सात्विक भी पुकारा जाता है।
शिवजी के ये त्रिगुण स्वरूप भैरव अवतार में भी देखे जाते हैं। शिवजी प्रदोषकाल में भैरव रूप में प्रकट हुए थे।
पं. शर्मा के मुताबिक शास्त्रों में अष्ट भैरव से लेकर 64 भैरव के स्वरूप बताए गए हैं। जानिए शिवजी के रज, तम और सत्व गुणों के आधार पर भैरव के स्वरूप कौन-कौन से हैं और किस मनोकामना के लिए कौन से स्वरूप की पूजा की जाती है...

  • बटुक भैरव

यह भैरव का सात्विक और बाल स्वरूप है। जो लोग सभी सुख, लंबी आयु, निरोगी जीवन, पद, प्रतिष्ठा और मुक्ति पाना चाहते हैं, वे बटुक भैरव की पूजा कर सकते हैं।

  • काल भैरव

यह भैरव का तामसिक स्वरूप है, लेकिन कल्याणकारी है। इस स्वरूप को काल का नियंत्रक माना गया है।इनकी पूजा अज्ञात भय, संकट, दुख और शत्रुओं से मुक्ति देने वाली मानी गई है।

  • आनंद भैरव

यह भैरव का राजस यानी सात्विक स्वरूप माना गया है। दस महाविद्या के अंतर्गत हर शक्ति के साथ भैरव की भी पूजा की जाती है। इनकी पूजा से धन, धर्म की सिद्धियां मिल सकती हैं।



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