Breaking News

यहां 260 वर्षों से मनाया जा रहा है 56 दिवसीय मुरजपम पर्व, 1 लाख दियों से होता है इसका समापन

जीवन मंत्र डेस्क. तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर में 21 नवंबर से मुरजपम् एवं लक्षदीपम् पर्व का आयोजन किया जा रहा है। यह सदियों पुराना अनुष्ठान है। जो हर 6 साल में एक बार आयोजित किया जाता है। 56 दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। मकर संक्रांति पर 1 लाख दीपक जलाकरइसका समापन किया जाता है। ये परंपरा 18 वीं शताब्दी के राजा मार्तंड वर्मा के समय से चली आ रही है।

  • 260 साल पहले हुई थी इस पर्व की शुरुआत

18 वीं शताब्दी के त्रावणकोर राजा मार्तंड वर्मा द्वारा अनुष्ठान की शुरुआत की गई। इन दिनों में भगवान पद्मनाभी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।राजा मार्तंड वर्मा ने केरल और दक्षिण भारत के सभी हिस्सों से वैदिक विद्वानों की भागीदारी के साथ पहली बार 56 दिवसीय मुरजापम आयोजित करने के बाद लक्षद्वीप मनाया। राजा वर्मा ने 3 जनवरी, 1750 को, भगवान पद्मनाभ स्वामी के चरणों में अपने मुकुट, तलवार और त्रावणकोर के पूरे देश का आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उन्होंने मकर संक्रांति पर लाखों दीप प्रज्वलित किए और लक्षदीपम् पर्व मनाया। तब से इस परंपरा की शुरुआत हुई।

  • मुरजपम का अर्थ है वैदिक मंत्रों का जाप

मुरजपम का अर्थ है परिक्रमा करते हुए वैदिक मंत्रों का जाप करना। मुरजपम वैदिक विद्वानों द्वारा चार वेदों के मंत्रों का अनुष्ठान है। जो आठ मुरों यानी राउंड में किया जाता है। जिनमें से प्रत्येक सात दिन की अवधि का होता है।मुरजपम की 56 दिनों की अवधि के दौरान, वेदों के मंत्रों का लगातार आठ चक्रों या मुरों में जप किया जाता है। प्रत्येक चक्र आठवें दिन पवित्र जुलूस के साथ समाप्त होता है जिसमें भगवान की मूर्ति को ले जाया जाता है।

  • 200 से ज्यादा वैदिक विद्वान शामिल होते हैं

मंदिर के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार वैदिक मंत्रों का जाप करने के लिए कांचीकामकोटी पीठ, अजवनचेरी मठ और देश के अन्य हिस्सों से मूक एवं प्राचीन तांत्रिक परिवारों से संबंधित लगभग 200 से ज्यादा वैदिक विद्वान शामिल होते हैं। इन विद्वानों द्वारा ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के मंत्रों का जाप किया जाता है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
The 56-day Murajapam festival is being celebrated here for 260 years, it ends with 1 lakh diyas


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2pK8UIY

No comments