जब बाधाएं आती हैं, हमें खुद ही उन्हें दूर करने की कोशिश करनी चाहिए, किसी की मदद का इंतजार न करें
जीवन मंत्र डेस्क। एक लोक कथा के अनुसार पुराने समय में एक आश्रम में गुरु अपने शिष्यों को यही सीख देते थे कि हमें अपना काम स्वयं करना चाहिए, कभी भी किसी से मदद लेने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए। जो लोग अपनी बाधाएं स्वयं दूर करते हैं, वही लोग घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। एक दिन गुरु अपने शिष्यों के साथ दूसरे गांव जा रहे थे। रास्ते में एक नाला दिखाई दिया। गुरु और शिष्यों को उस नाले को पार करके दूसरे गांव पहुंचना था।
- जब वे लोग नाला पार कर रहे थे, तभी गुरु के हाथ से कमंडल छुट गया और नाले में गिर गया। गुरु किनारे पर ही रुक गए। सभी शिष्य सोचने लगे कि अब ये कमंडल कैसे निकालेंगे। तभी एक शिष्य गांव में किसी सफाईकर्मी को खोजने के लिए चला गया। शेष शिष्य वहीं बैठकर कमंडल निकालने की योजना बनाने लगे। ये देखकर गुरु बहुत दुखी हो गए, क्योंकि उन्होंने सिखाया था कि अपनी बाधाएं स्वयं दूर करनी चाहिए। किसी दूसरे की मदद के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए।
- काफी देर बाद एक शिष्य उठा और नाले में हाथ डालकर कमंडल खोजने लगा। जब हाथ डालने के बाद भी कमंडल नहीं मिला तो वह स्वयं नाले में उतर गया और कमंडल खोज निकाला। देखकर गुरु प्रसन्न हो गए, क्योंकि शिष्य ने उनके पाठ को जीवन में उतार लिया था।
- गुरु ने सभी शिष्यों के सामने उस शिष्य की प्रशंसा की और कहा कि इसी तरह हमें अपने कामों के लिए किसी दूसरे की मदद का इंतजार नहीं करना चाहिए। जो लोग इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं, वे कभी भी अपनी समस्याओं को हल नहीं कर पाते हैं। अपनी मदद खुद करने वाले लोग ही घर-परिवार और समाज में सम्मान हासिल करते हैं।
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