उत्तराखंड के चमौली में बना हेमकुंड साहिब तीर्थ, गुरु गोबिन्द सिंह ने यहां की थी तपस्या
जीवन मंत्र डेस्क. हेमकुंड साहिब जी सिखों का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। हेमकुंड एक बर्फ की बनी झील है जो सात विशाल पर्वतों से घिरी हुई है, जिन्हें हेमकुंड पर्वत भी कहते हैं।कार्तिक पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले प्रकाश पर्व परयहां विशेष उत्सव मनाया जाता है। इस बार प्रकाश पर्व 12 नवंबर को मनाया जाएगा।
- गुरुगोबिंद सिंह ने की तपस्या
ऐसी मान्यता है कि हेमकुंड साहिब में सिखों के दसवें गुरु गुरुगोबिंद सिंह ने करीब 20 सालों तक तपस्या की थी। जिस स्थान पर गुरु जी ने ध्यान लगाया था वहीं ये गुरुद्वारा बना हुआ है। गुरुद्वारे के साथ ही पवित्र सरोवर है जिसे हेम सरोवर के नाम से जाना जाता है। गुरुद्वारे में माथा टेकने से पहले सिख श्रद्धालू इस पवित्र सरोवर में स्नान करते हैं। यहां पास में भगवान लक्ष्मण को समर्पित एक मंदिर है। कहा जाता है कि सबसे पहले गुरुगोबिंद सिंह ही इस मंदिर में पूजा करने के लिए यहां आए थे।
- आत्मकथा में किया उल्लेख
इस जगह का उल्लेख गुरु गोबिंद सिंह जी की आत्मकथा में भी मिलता है। दसवें ग्रंथ के अनुसार, पांडु राजा इस जगह पर अभ्यास योग करते थे। संत सोहन सिंह, जो सिख धर्म का उपदेश दिया करते थे उन्हें एक बार उपदेश देने के दौरान गुरु गोबिंद सिंह के तपस्या स्थल का ख्याल आया और उनके मन में इस जगह को खोजने की इच्छा जागृत हुई। काफी खोजबीन के बाद उन्हें अपने गुरु के पवित्र स्थल के दर्शन हुए।
- लहराता है खालसा का प्रतीक ध्वज
यह स्थल गुरु गोबिंद सिंह जी के यहां आने से पहले भी तीर्थ माना गया है। इस स्थान को पहले लोकपाल कहा जाता था, जिसका अर्थ विश्व के रक्षक होता है। कहा जाता है कि लोकपाल वही जगह है, जहां लक्ष्मण जी मन भावन स्थान होने के कारण ध्यान पर बैठ गए थे। हेमकुण्ड साहिब के पास सप्तऋषि चोटियां स्थित हैं, जिन पर खालसा पंथ का प्रतीक निशान साहिब पर ध्वज लहराता है।
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