जीवन मंत्र डेस्क। शनिवार, 30 नवंबर को अगहन यानी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है। इसे विनायकी चतुर्थी कहते हैं। इस तिथि पर गणेशजी के लिए व्रत-उपवास किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनिवार को शनि के लिए विशेष पूजा-पाठ की जाती है। इस बार शनिवार को चतुर्थी व्रत होने से इस दिन शनि के साथ ही गणेशजी की भी पूजा खासतौर पर करनी चाहिए।
चतुर्थी तिथि पर सुबह जल्दी उठें, स्नान के बाद सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं। पूजा का धागा, वस्त्र अर्पित करें। चावल चढ़ाएं।गणेशजी के मंत्र बोलते हुए दूर्वा चढ़ाएं। लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर से भगवान श्रीगणेश की आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें।
- गणेशजी के 12 नाम मंत्रों का जाप करें
भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और मंत्रों का जाप करें। मंत्र- ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।
पं. शर्मा के अनुसार शनिदेव का स्वरूप नीला बताया गया है। इसीलिए शनि को नीले वस्त्र और नीले चढ़ाए जाते हैं। शनि के लिए तेल का दान कर सकते हैं। इस संबंध में मान्यता है कि पुराने समय में शनि और हनुमानजी के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में शनि की पराजय हुई थी। हनुमानजी के प्रहारों से शनि को पीड़ा हो रही थी। इस पीड़ा से मुक्ति के लिए हनुमानजी ने शनि को शरीर पर लगाने के लिए तेल दिया था। तेल लगाते ही शनि की पीड़ा दूर हो गई। तभी से शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
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