किसी शांत स्थान पर माता गायत्री की तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठकर करना चाहिए गायत्री मंत्र का जाप
गायत्री मंत्र
ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।इस मंत्र का शाब्दिक अर्थ यह है कि सृष्टि की रचना करने वाले, प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, परमात्मा का यह तेज हमारी बुद्धि को सही मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।
जाप से जुड़ी ये बातें ध्यान रखें
गायत्री मंत्र का जाप किसी शांत एवं पवित्र स्थान पर करना चाहिए। इसके लिए स्नान आदि कर्मों से पवित्र होकर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद गायत्री माता की मूर्ति या चित्र के सामने कुश के आसन पर बैठें। माता का पूजन करें और गायत्री मंत्र का जाप करें। जाप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए।
- जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए। ये मंत्र सर्वश्रेष्ठ मंत्रों में से एक है। इसके जाप के लिए तीन समय बताए गए हैं। इन तीन समय को संध्याकाल कहा जाता है।
- मंत्र का जाप का पहला समय है सुबह का समय का। सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जाप शुरू करना चाहिए और सूर्योदय के बाद तक जाप करना चाहिए। दूसरा समय है दोपहर का। दोपहर में भी इस मंत्र का जाप किया जाता है। तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले का। सूर्यास्त से पहले मंत्र जाप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जाप करना चाहिए।
- इन तीन समय के अतिरिक्त अगर जाप करना हो तो मौन रहकर, मानसिक रूप से करना चाहिए। मंत्र जाप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए।
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