अमावस्या पर स्नान करते समय ध्यान करें पवित्र नदियों का, इससे मिलता है तीर्थ स्नान का पुण्य
जीवन मंत्र डेस्क। मंगलवार, 26 नवंबर को अगहन यानी मार्गशीर्ष मास की अमावस्या है। इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करने की और तीर्थ यात्रा करने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जो लोग इस दिन किसी नदी में स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को धन का दान करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। अक्षय पुण्य यानी ऐसा पुण्य जिसका कभी क्षय नहीं होता है। इसी वजह से देशभर की सभी नदियों में अमावस्या पर श्रद्धालु स्नान करते हैं। जो अमावस्या पर नदी में स्नान नहीं कर पाते हैं, वे अपने घर में ही स्नान करते समय पवित्र नदियों का ध्यान करके पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं। जानिए अमावस्या तिथि पर घर में कैसे स्नान करना चाहिए...
नहाते समय पानी में मिलाएं गंगाजल
जो लोग नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लेना चाहिए। इस जल से स्नान करें और स्नान मंत्र का जाप करें।
- स्नान मंत्र : गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥
स्नान करते समय ये मंत्र बोलने से घर पर ही तीर्थ स्नान के बराबर पुण्य मिलता है। इस मंत्र में सात पवित्र नदियों के नाम हैं। नहाते से इनका जाप करना चाहिए।
त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं को भी गंगा नदी विशेष प्रिय है। इन तीनों देवताओं के नाम के साथ गंगा मां के मंत्र का जाप भी कर सकते हैं...
- ब्रह्मकुंडली, विष्णुपादोदकी, जटाशंकरी, भागीरथी, जाह्नवी।
ध्यान रखें मंत्र जाप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। स्नान के बाद सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाना चाहिए। साथ ही, ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। इसके बाद पितरों के लिए धूप-ध्यान करना चाहिए।
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