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26 दिसंबर की सुबह होगा सूर्य ग्रहण, भारत में दिखेगा, ग्रहण के समय क्या करें और क्या नहीं

जीवन मंत्र डेस्क। साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण गुरुवार, 26 दिसंबर को हो रहा है। ये ग्रहण भारत में दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण गुरुवार सुबह 8.04 से शुरू होगा और 10.56 मिनट पर खत्म होगा। इस दिन पौष मास की अमावस्या तिथि रहेगी। जानिए उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार सूर्य ग्रहण से जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब…
प्रश्न 1- ये सूर्य ग्रहण कहां-कहां दिखेगा?
उत्तर- ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार भारत के अलावा ये ग्रहण एशिया के कुछ देश, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा। भारत में ग्रहण काल 2 घंटे 52 मिनट का रहेगा। सुबह 8.04 बजे से ग्रहण का आरंभ होकर सुबह 9.30 बजे मध्य काल और सुबह 10.56 बजे ग्रहण खत्म होगा।
प्रश्न 2 - इस ग्रहण का भारत में ज्योतिषीय असर होगा या नहीं?
उत्तर - उज्जैन पं. मनीष शर्मा के अनुसार भारत में ये ग्रहण दिखेगा, इस कारण यहां सूतक रहेगा। सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पूर्व से माना जाता है। 25 दिसंबर की रात 8 बजे से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो ग्रहण के मोक्ष के साथ समाप्त होगा।

प्रश्न 3 - सूर्य ग्रहण के समय पूजा-पाठ करें या नहीं?
उत्तर - भारत में ये ग्रहण दिखेगा, इस कारण यहां ग्रहण से संबंधित सावधानी, सूतक रखना चाहिए। सूतक के समय पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए। ग्रहण के समय मानसिक रूप से मंत्रों का जाप कर सकते हैं। जैसे राम नाम, ऊँ नम शिवाय, सीताराम, श्री गणेशाय नम: आदि मंत्रों का जाप कर सकते हैं। आप चाहे तो अपने इष्टदेव का ध्यान भी कर सकते हैं।

प्रश्न 4 - सूर्य ग्रहण के समय कौन-कौन से काम न करें?
उत्तर - ग्रहण के समय गर्भवती स्त्री को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि ऐसे समय में सूर्य से हानिकारक तरंगे निकलती हैं जो कि मां और बच्चे की सेहत के लिए हानिकारक होती हैं। तेल मालिश नहीं करना चाहिए। खाने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल देना चाहिए, जिससे कि पका हुआ खाना ग्रहण के कारण अशुद्ध होने से बच जाए।

प्रश्न 5 - सूर्य ग्रहण के बाद क्या-क्या करें?
उत्तर - ग्रहण खत्म होने के बाद घर की सफाई करनी चाहिए। घर में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्नान करना चाहिए। पूजा-पाठ करना चाहिए।

प्रश्न 6 - ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यता क्या है?
उत्तर - पं. शर्मा के अनुसार ग्रहण के संबंध में समुद्र मंथन की कथा प्रचलित है। प्राचीन काल में में देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन से अमृत कलश निकला तो देवताओं और दानवों के बीच युद्ध होने लगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और देवताओं को अमृतपान करवाया। उस समय राहु नाम के असुर ने भी देवताओं के वेश में अमृत पान कर लिया था। चंद्र और सूर्य ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। विष्णुजी ने क्रोधित होकर राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। राहु ने भी अमृत पी लिया था, इस कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई। इस घटना के बाद राहु चंद्र और सूर्य से शत्रुता रखता है और समय-समय पर इन ग्रहों को ग्रसता है। इसी घटना को सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं।
प्रश्न 7 - विज्ञान के अनुसारकब होता है सूर्य ग्रहण?
उत्तर - जब पृथ्वी पर चंद्र की छाया पड़ती है, तब सूर्य ग्रहण होता है। इस दौरान सूर्य, चंद्र और पृथ्वी एक लाइन में आ जाते हैं।



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