जीवन मंत्र डेस्क। रविवार, 8 दिसंबर को अगहन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। द्वापर युग में इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसे मोक्षदा एकादशी और गीता जंयती कहा जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप बाल गोपाल की पूजा करनी चाहिए। जानिए एकादशी पर बाल गोपाल की पूजा की सरल विधि...
बाल गोपाल की मूर्ति को के लिए सोने, चांदी या तांबे का पात्र, लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले पीले वस्त्र और आभूषण, चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध, माखन, मिश्री, तुलसीदल, तिल, प्रसाद के लिए फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, पान, दक्षिणा।
सबसे पहले गणेशजी के सामने पूजा का संकल्प लें। गणेश पूजन करें। गणेशजी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, धूप, दीप, चावल से पूजन करें। गणेश पूजा के बाद बाल गोपाल की पूजा करें। बाल गोपाल को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और फिर जल से स्नान कराएं। पीले वस्त्र अर्पित करें। आभूषण पहनाएं।
पुष्प माला पहनाएं। अब अष्टगंध से तिलक करें। माखन, मिश्री अर्पित करें। तुलसीदल अर्पित करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें। फूल अर्पित करें। आरती के बाद परिक्रमा करें।
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश में कहा कि हमें कर्म करते रहना चाहिए, फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। जो लोग धर्म के अनुसार काम करते हैं, उन्हें एक दिन सफलता जरूर मिलती है। सुख-सुविधा की किसी भी चीज से मोह नहीं रखना चाहिए। सुख हो या दुख, हर हाल में प्रसन्न रहना चाहिए। तभी जीवन सफल हो सकता है।
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