भीष्म ने भाई के विवाह के लिए किया था अंबा, अंबिका और अंबालिका का हरण
- अंबा अपने प्रेमी के पहुंची तो प्रेमी ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। इसके बाद अंबा फिर से हस्तिनापुर पहुंची। वहां भी विचित्रवीर्य ने उसे अपनाने से मना कर दिया। अंत में अंबा ने भीष्म से विवाह करने को कहा, इस पर भीष्म ने कहा कि मैंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की है, मैं विवाह नहीं कर सकता।
- हताश होकर अंबा परशुराम के पास पहुंची और भीष्म से बदला लेने का आग्रह किया। परशुराम अंबा की बात मानकर भीष्म से युद्ध करने पहुंच गए, लेकिन भीष्म ने उन्हें पराजित कर दिया। यहां भी निराशा मिलने के बाद अंबा ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तप किया।
- तप से प्रसन्न होकर शिवजी अंबा के सामने प्रकट हुए। तब अंबा ने शिवजी से कहा कि मैं चाहती हूं कि मेरी वजह से इच्छामृत्यु का वरदान पाए हुए भीष्म की मृत्यु हो। मुझे ऐसा वर दीजिए। शिवजी ने कहा कि ऐसा तुम्हारे इस जन्म में नहीं हो पाएगा। इसके लिए तुम्हें दूसरा जन्म लेना होगा। ऐसा कहकर शिवजी अंतर्ध्यान हो गए।
- अंबा ने भीष्म से बदला लेने के लिए अपना जीवन समाप्त कर दिया। अगले जन्म में अंबा ने शिखंडी के रूप में राजा द्रुपद के यहां जन्म लिया। राजा ने राजकुमारी का पालन पुरुष की तरह ही किया था। एक यक्ष से वर पाने के बाद शिखंडी पुरुष बन गई थी। महाभारत युद्ध में यही शिखंडी भीष्म की मृत्यु का कारण बना।
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