गुरुवार, सूर्य ग्रहण और अमावस्या आज, शाम को तुलसी के पास जलाएं दीपक और करें विष्णु-लक्ष्मी पूजा
- अभी ठंड के दिन हैं, इस कारण अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को गर्म कपड़ों का दान करें। अपने सामर्थ्य के अनुसार धन और अनाज का दान भी करें।

- अमावस्या तिथि पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। गुरुवार और अमावस्या के योग में भगवान विष्णु और लक्ष्मी की विशेष पूजा करें। गुरुवार को भगवान विष्णु के विशेष पूजन की परंपरा है।
- ज्योतिष के अनुसार गुरुवार को गुरु ग्रह के लिए भी पूजन किया जाता है। इस वार का कारक ग्रह गुरु ही है। इसीलिए गुरुवार को शिवलिंग पर चने की दाल चढ़ाएं। गुरु ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में ही की जाती है। शिवजी को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

- अमावस्या पर सूर्यास्त के बाद हनुमान के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास पर्याप्त समय हो तो सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं। हनुमानजी को फलों का भोग लगाएं। श्रीराम नाम या सीताराम मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें।
- गुरुवार को केले के पौधे की पूजा करने की भी परंपरा है। आप केले की पूजा भी आज कर सकते हैं। पूजन में केले को पौधे को हल्दी की गांठ भी विशेष रूप से चढ़ाई जाती है।

- शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए।
- अमावस्या पर किसी मंदिर में या किसी ब्राह्मण को अन्न और धन का दान करें।
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