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बैंकिंग, एएमसी और चुनिंदा एनबीएफसी स्टॉक में निवेश से अच्छा रिटर्न संभव

यूटिलिटी डेस्क. भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक साल में बुरा समय झेला है। दूसरी तिमाही में ग्रोथ रेट 4.5% रही जो पिछली 26 तिमाहियों में न्यूनतम है। खपत में कमी, एमएसपी में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने की वजह से ग्रामीण इलाकों में सुस्ती और एनबीएफसी संकट अर्थव्यवस्था में गिरावट के बड़े कारण रहे हैं।


इनके अलावा अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती ने भी भारतीय एक्सपोर्ट को बढ़ने का मौका नहीं दिया। हालांकि, इसके बावजूद भारत के बेंचमार्क इंडिसेज ऑलटाइम उच्चतम स्तर के आसपास हैं। निफ्टी और सेंसेक्स ने पिछले तीन महीनों (सितंबर से नवंबर) में 12% की ग्रोथ हासिल की है। अक्टूबर और नवंबर में मार्केट में घरेलू और विदेशी निवेशकों ने निवेश किया। ग्लोबल निवेशक मुख्यतः ईटीएफ के जरिए आया है। कम समय में पैसों की तेज आवक से शेयर बाजार तेजी पर हैं। पूरा मार्केट इस तरह की रैली में शामिल नहीं है। कुछ ही स्टॉक्स में ज्यादा तेजी रही। जनवरी-मार्च तिमाही अब पहले की तुलना में ज्यादा उम्मीद जगाने वाली लग रही है।


मौजूदा परिस्थिति में इंश्योरेंस कंपनियों पर फोकस रखा जा सकता है। बड़े कॉरपोरेट बैंक, एएमसी कंपनियां और कुछ रिटेल एनबीएफसी कंपनियां अच्छा विकल्प हो सकती हैं। एनबीएफसी सेक्टर की उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास अच्छा बिजनेस मॉडल हो। पिछली तिमाही में इंश्योरेंस बिजनेस ने अच्छा अर्निंग ग्रोथ दर्ज किया है। 2019-20 की पहली छमाही में लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियर में 35% का उछाल आया है। मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी ट्रांजिशन फेज से गुजर रही है और इनके बिजनेस में भी मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है। ऑटो एंसिलरी सेक्टर में लॉन्ग टर्म प्लानिंग के तहत निवेश किया जा सकता है।


मिड टर्म में सुस्ती का दौर कायम रह सकता है
सरकार और आरबीआई आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए कई तरह के उपाय कर रहे हैं। हालांकि, उनके प्रयासों के बावजूद मीडियम टर्म में सुस्ती का दौर बना रह सकता है। कुछ स्टॉक्स में तेजी से रैली की उम्मीद की जा सकती है। जिन कंपनियों के फंडामेंटल अच्छे हैं उनमें निवेश किया जा सकता है।



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प्रतीकात्मक फोटो


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