पौष मास की पूर्णिमा 10 जनवरी को, इस दिन तीर्थ स्नान और दान का है विशेष महत्व
जीवन मंत्र डेस्क. शुक्रवार 10 जनवरी को पौष माह की पूर्णिमा है। हिंदू धर्म में इसका बहुत ही महत्व है। मोक्ष की कामना रखने वाले लोगों के लिए ये दिन बहुतही खास माना जाता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि पौष महीने की पूर्णिमा मोक्ष दिलाती है। ग्रंथों के अनुसार पौष मास के दौरान जो लोग पूरे महीने भगवान का ध्यान कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं, उसकी पूर्णता पौष पूर्णिमा के स्नान से हो जाती है। इस दिन काशी, प्रयाग और हरिद्वार में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। जैन धर्म में इस दिन शाकंभरी जयंती मनाई जाती है। वहीं, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन छेरता पर्व मनाती हैं।
कब से कब तक रहेगी पूर्णिमा
इस बार पूर्णिमा 10 जनवरी को रात 2.30 बजे से प्रारंभ हो रही है।इसके बाद 11 जनवरी की रात 12.10 तक रहेगी। लिहाजा स्नान, पूजन और दान के लिए10 जनवरी को ही पुण्यकाल माना जाएगा।
तीर्थ स्नान का महत्व
पौष माह की पूर्णिमा पर सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद तीर्थ या पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। ऐसा संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाना चाहिए। इसके बाद पूरे दिन व्रत और दान का संकल्प लेना चाहिए। फिर किसी तीर्थ पर जाकर नदी की पूजा करनी चाहिए। पौष माह की पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों और तीर्थ स्थानों पर पर स्नान करने का महत्व बताया गया है।नदी पूजा और स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होता है।
साल का पहला चंद्र ग्रहण
पौष पूर्णिमा पर 10 जनवरी काे साल का पहला चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यह ग्रहण 4.01 घंटे अौर 7 सेकंड रहेगा। ग्रहण का आरंभ 10 जनवरी की रात 10.39 बजे से शुरू होगा और 11 जनवरी को तड़के 2.40 बजे समाप्त होगा। हालांकि भारत में ये ग्रहण नहीं दिखेगा। इसलिए इसका महत्व नहीं है। लेकिन पूर्णिमा पर्व होने से इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा।
पौष पूर्णिमा पर माघ स्नान का संकल्प
शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा को माघ स्नान का संकल्प ले लेना चाहिए। तीर्थ स्नान के दौरान संकल्प करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही संभव हो तो एक समय भोजन का व्रत भी करना चाहिए। जिस प्रकार पौष मास में तीर्थ स्नान का बहुत महत्व है, उसी प्रकार माघ में भी स्नान और दान का भी विशेष महत्व होता है। माघ में दान में तिल, गुड़ और कंबल या ऊनी वस्त्र दान देने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
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