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बजट 2020; आयकर या जीएसटी रेट में कटौती के बजाय इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक ध्यान दे सकती है सरकार

यूटिलिटी डेस्क. मोदी सरकार के दूसरे बजट से उम्मीदें बहुत अधिक हैं। बाजार का मानना है कि सरकार बजट में खपत बढ़ाने के लिए टैक्स में राहत दे सकती है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्कीम ला सकती है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यम (एमएसएमई) और हाउिसंग सेक्टर पर दबाव कम करने के लिए उपायों का ऐलान कर सकती है। निजी और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नीतियां ला सकती है।

राजकोषीय घाटे केआंकड़े पर भी बाजार की बारीक नजर होगी। इसके अलावा बाजार एलटीसीजी में भी राहत के संकेत मिलने का इंतजार कर रहा है। कुल मिलाकर देखें तो सरकार के पास उपाय करते वक्त संतुलन साधना मुश्किल होगा।आयकर टैक्स स्लैब में इजाफे से शहरी खपत बढ़ेगी। टैक्स राहत से हो सकता है जीडीपी ग्रोथ मेंतत्काल इजाफा न हो, इसिलए सरकार आयकर/जीएसटी रेट में कटौती के बजाय इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस कर सकती है। 2019 के आखिरी दो महीनों में जीएसटी कलेक्शन बढ़ा है, लेकिन पूरे साल के आंकड़े देख तो ये उत्साहवधर्क नहीं हैं। लिहाजा गुंजाइश सीमित है।


रियल एस्टेट सेक्टर के लिए इन्सेंटिव संभव
रोजगार के अधिक अवसर पैदा होने का जीडीपी ग्रोथ पर दूरगामी असर होता है। सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर निमार्ण पर विशेष ध्यान दे सकती है। हाउिसंग सेक्टर में कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रियल एस्टेट सेक्टर के लिए इन्सेंटिव का ऐलान संभव है।



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Budget 2020; Government can pay more attention to infrastructure than income tax or GST rate cut


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