9 फरवरी तक माघ माह, मकर संक्रांति पर सूर्यदेव और बसंत पंचमी पर सरस्वती की पूजा करें
- शुक्रवार, 10 जनवरी को शाकंभरी पूर्णिमा है। ये पौष मास का अंतिम दिन है। इसी दिन से माघ मास के स्नान शुरू हो जाएंगे। पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने का विधान है।
- सोमवार, 13 जनवरी को गणेश चतुर्थी व्रत है। इसे तिल चतुर्थी भी कहते हैं। इस दिन भगवान गणेशजी के लिए व्रत-उपवास, पूजन किए जाते हैं। 13 जनवरी को ही लोहड़ी उत्सव भी मनाया जाएगा।
- बुधवार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति है। सूर्य जब धनु राशि से मकर में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के सूर्य पूजा और दान-पुण्य करने की परंपरा प्रचलित है। 15 जनवरी को सूर्य के राशि बदलने से खरमास भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद मांगलिक कर्म, विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ काम फिर से शुरू हो जाएंगे।
- सोमवार, 20 जनवरी को षट्तिला एकादशी है। इस दिन भगवान को तिल से बने व्यंजन का भोग लगाया जाता है और स्वयं भी इन व्यंजन का सेवन करना चाहिए।
- बुधवार, 22 जनवरी को प्रदोष व्रत पर शिवजी और पार्वती का अभिषेक करना चाहिए।
- शुक्रवार, 24 जनवरी को मौनी अमावस्या है। इस तिथि पर नदियों में स्नान करने के बाद दान-पुण्य करना चाहिए। पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण करना चाहिए।
- मंगलवार, 28 जनवरी को अंगारक विनायक चतुर्थी है। जब मंगलवार को विनायक चतुर्थी आती है तो उसे अंगारक विनायक चतुर्थी कहते हैं।
- गुरुवार, 30 जनवरी को बसंत पंचमी है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए। प्राचीन समय में इसी तिथि पर देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं।
- शनिवार, 1 फरवरी को मां नर्मदा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस तिथि पर नर्मदा नदी की विशेष पूजा करें।
- बुधवार, 5 फरवरी को जया एकादशी है। इसे भीष्म एकादशी कहते हैं। इस तिथि पर भगवान विष्णु के लिए व्रत उपवास करें और सूर्यास्त के बाद तुलसी पूजा करें।
- रविवार, 9 फरवरी को माघ मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इस दिन संत रविवदास की जयंती भी है। माघी पूर्णिमा पर इस माह के स्नान भी समाप्त हो जाएंगे। 10 फरवरी से फाल्गुन मास शुरू हो जाएगा।
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