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सेविंग स्कीम की जगह ईएलएसएस निवेश कर सकता है वेल्थ क्रिएशन

यूटिलिटी डेस्क. इनकम टैक्स एक्ट में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनके जरिए सैलरी पाने वाले लोग टैक्स में बचत कर सकते हैं। इनमें से सेक्शन 80सी टैक्स बचत की सबसे बड़ी संभावना प्रदान करता है। इसके जरिए सैलरी पाने वाले लोग 1.5 लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्स में बचत कर सकते हैं। सैलरीड क्लास के लिए सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्य वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करना है। वित्तीय स्वतंत्रता का सबसे जरूरी पक्ष वेल्थ क्रिएशन है। 80सी के तहत मौजूद विकल्पों के जरिए सेविंग्स और निवेश कर इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


ईएलएसएस बेहतर रिटर्न प्रदान करता है
80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। पीपीएफ, एनएससी, टैक्स सेविंग टर्म डिपोजिट और ईएलएसएस आदि इनमें शामिल हैं। ईएलएसएस मार्केट जोखिमों के अधीन आते हैं। लोकप्रिय पारंपरिक टैक्स सेविंग्स स्कीम में से एक रहे पीपीएफ ने 15 सालों में 8.5% का सालाना रिटर्न दिया है। समान अवधि में निफ्टी 50 टीआरआई ने 14.8% का रिटर्नदिया है। 80सी के तहत आने वाले तमाम स्मॉल सेविंग्स स्कीम और फिक्स्ड डिपोजिट पर मिलने वाली ब्याज दर पिछले 15 सालों में ईएलएसएस से कम रही है।


ईएलएसएस में एसआईपी के जरिए निवेश कर सकते हैं
घर खरीदना, शिक्षा, शादी ऐसे खर्च हैं जिनके लिए बड़ी राशि की जरूरत होती है। एसआईपी के जरिए ईएलएसएस में निवेश कर इसे हासिल कर सकते हैं। ईएलएसएस में 3 साल का लॉक इन पीरियड होता है। पीपीएफ में 15 और एनएसी में 5 साल का लॉक इन पीरियड है। ईएलएसएस यूनिट बेचने पर 1 लाख रुपए से अधिक की राशि पर 10% की दर से एलटीजीसी लगता है।



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ELSS is better option for investment then saving scheme


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