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वसीयत लिखें ही नहीं, उसे रजिस्टर्ड भी कराए; इसके लिए कानूनी सलाह लेना फायदेमंद

यूटिलिटी डेस्क. वे सभी लोग जिनके पास धन-संपत्ति है, वे वसीयत करा सकते हैं। वसीयत यानी 'विल डाक्यूमेंट्स' एक ऐसा दस्तावेज है जो परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के बंटवारे को क्लीयर करता है। यह वसीयत इतनी पॉवरफुल होती है कि व्यक्ति के जीवित न रहने पर इसमें लिखा सर्वोच्च अदालत भी मान्य करती है।


वैसे देखा जाए तो हर व्यक्ति को वसीयतनामा तैयार करना चाहिए। ऐसा करने से उसके न रहने पर परिवार में शांति बनी रहती है। पारिवारिक विवादों से बचने के लिए 'विल' लिखना न केवल उत्तराधिकार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह न तो एजटिल प्रक्रिया है और न ही महंगी। इसलिए कानूनी तौर पर वसीयत लिखना हमेशा बुद्धिमानी का काम होता है, ताकि आपकी धन-संपत्ति आपकी इच्छा के अनुसार आपके वारिसों में बांटी जा सके। संपत्तियों के वितरण में विशेषज्ञों की जरूरत होती है, इसलिए कानूनी सलाह लेना फायदेमंद रहता है।


वसीयतों के प्रकार
वसीयतें दो प्रकार की होती हैंः विशेषाधिकार युक्त और बिना विशेषाधिकार के। एक विशेषाधिकार युक्त वसीयत एक अनौपचारिक वसीयत होती है जिसे सिपाहियों, वायु सैनिकों और नौ-सैनिकों द्वारा बनाया जाता है जो साहसिक यात्राओं या युद्ध में गए हुए होते हैं। अन्य सभी वसीयतों को विशेषाधिकार रहित वसीयत कहा जाता है। विशेषाधिकार सहित वसीयतों को लिखित में या मौखिक घोषणा के रूप में और अपनी जान को जोखिम डालने जा रहे लोगों द्वारा एक अल्प समय के नोटिस द्वारा तैयार करवाया जा सकता है, जबकि विशेषाधिकार रहित वसीयत में औपचारिकताओं को पूरा करना जरूरी होता है।


किस उम्र में लिखना चाहिए वसीयत
इसकी कोई उम्र निर्धारित नहीं है, लेकिन कानूनी रूप से जो भी व्यक्ति 21 वर्ष का हो चुका हो, वह अपनी वसीयत बना सकता है। इसके अलावा, जिस व्यक्ति का दिमाग ठीक हो, जो दुष्कर्म, धोखाधड़ी, बुरे आचरण, भ्रष्टाचार से मुक्त रहा हो। वैसे, कानूनी सलाहकारों के अनुसार कम उम्र में वसीयत लिखने से आगे चलकर पारिवारिक विवाद नहीं होते। इसके अलावा, वसीयत लिखना तभी ठीक रहता है, जब व्यक्ति के सभी अंग ठीक से काम कर रहे होते हैं।


वकील से बनवाना ठीक रहता है
वसीयत लिखने के लिए किसी वकील का होना जरूरी नहीं है। लेकिन, किसी वकील की मदद लेकर इसे तैयार करते हैं तो फर्जीवाड़े, गलतफहमी या धोखाधड़ी की आशंका कम हो जाती है। ऐसा करने से कोर्ट में वसीयत को गलत साबित करने की आशंका भी नहीं रहती। कानूनी तौर पर टाइप की हुई अथवा हाथ से लिखी गई, दोनों ही वसीयत मान्य हैं।


वसीयत का रजिस्ट्रेशन जरूरी
आपकी लिखी वसीयत से छेड़छाड़ न हो, इससे बचने के लिए इसका रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए। इसके लिए रजिस्ट्रार या उप रजिस्ट्रार के पास जाएं। उनके बताए अनुसार निर्धारित फीस भरें और रजिस्टर करा लें। इसके लिए आपको दो गवाहों की जरूरत पड़ेगी। यह ध्यान रखें कि गवाह वे ही मान्य हैं, जो आपकी पहचान वाले हों, लेकिन उनका आपकी वसीयत से कोई लेना-देना न हो।



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