एक अप्रैल से महंगी होगी विदेश यात्रा, बजट में लगाया गया है 5% टैक्स
यूटिलिटी डेस्क. इस साल 1 अप्रैल से विदेश यात्रा महंगी हो सकती है। नए वित्त वर्ष से विदेशी टूर पैकेज खरीदना और विदेशों में कोई भी पैसा भेजना महंगा हो जाएगा। अगर कोई विदेशी टूर पैकेज खरीदता है या भारतीय मुद्रा के बदले विदेशी करेंसी एक्सचेंज कराता है तो 7 लाख रु. से अधिक की रकम पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (टीसीएस) देना होगा। केंद्र सरकार ने बजट 2020 में आयकर की धारा 206सी में संशोधन कर टीसीएस लगाने का प्रस्ताव दिया है। इन विदेशी टूर पैकेज में भारत के बाहर किसी एक देश या कई देशों का टूर पैकेज शामिल हैं। इनमें ट्रैवल का खर्च, होटल में ठहरने का खर्च, बोर्डिंग, लॉजिंग समेत अन्य तरह के सभी खर्च शामिल होंगे। सरकार के इस प्रस्ताव के बाद अब विदेशों में पढाई के लिए जाने से लेकर छुट्टियां मनाना तक महंगा हो जाएगा।
अगर कोई विदेशों में ट्रैवल, शिक्षा व अन्य तरह का कोई खर्च करता है या किसी को गिफ्ट भेजता है या फिर निवेश करता है तो इस तरह का ट्रांजेक्शन आरबीआई के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत रेगुलेट होगा। इसके तहत उच्चतम सीमा एक वित्त वर्ष में 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर तय की गई है। 70 रुपए के एक्सचेंज रेट के हिसाब से यह रकम करीब 1.75 करोड़ रुपए होती है।
क्या है नया नियम
आयकर कानून, 1961 की धारा 206सी के तहत अगर कोई अधिकृत डीलर एक वित्त वर्ष में 7 लाख रुपए से अधिक रकम को एलआरएस के जरिए विदेश में फंड भेजता है तो उन्हें 5 फीसदी की दर से टीसीएस देना होगा। साथ ही विदेशी टूर पैकेज के लिए किसी भी राशि पर टीसीएस लगेगा। अगर पैन या आधार मुहैया नहीं कराया जाता है तो इसके लिए 5 फीसदी की जगह 10 फीसदी की दर से टीसीएस देना होगा।
मिल सकता है रिफंड
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इनकम टैक्स दाखिल कर इस पर रिफंड क्लेम किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक रिफंड केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो आईटीआर दाखिल करते हैं।
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