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माघी पूर्णिमा 9 फरवरी को, इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान-पुण्य करने की परंपरा

जीवन मंत्र डेस्क. रविवार, 9 फरवरी को माघ मास की पूर्णिमा है। हिन्दी पंचांग के अनुसार ये माघ मास की अंतिम तिथि है। अगले दिन यानी 10 फरवरी से फाल्गुन मास शुरू हो जाएगा। इस पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा कहा जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार माघी पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि इस तिथि पर श्रीहरि गंगा में वास करते हैं। इस वजह से माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व काफी अधिक है। 9 फरवरी को माघ मास के स्नान समाप्त हो जाएंगे। जानिए इस शुभ तिथि पर और कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…

इस तिथि पर दान-पुण्य का है विशेष महत्व

> माघी पूर्णिमा की पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान के बाद सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम से 108 बार करना चाहिए। किसी गरीब को गुड़ का दान करें। इस दिन संभव हो सके तो किसी पवित्र में नदी में भी स्नान करना चाहिए।
> स्नान के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और विष्णु-लक्ष्मी का अभिषेक करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। पूजा में भगवान को पूजन सामग्री के साथ ही मिठाई और फल-फूल भी अर्पित करें।
> भगवान की पूजा के बाद पितर देवताओं के लिए श्राद्ध कर्म करना चाहिए। इस तिथि पर जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े, तिल, कंबल का दान करना चाहिए।
> ध्यान रखें इस पर्व पर घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। क्लेश न करें। प्रेम से रहें। घर में स्वच्छता और शांति बनाए रखें।
> क्रोध से बचें और सभी का सम्मान करें। घर के वृद्ध लोगों का आशीर्वाद लेकर काम की शुरुआत करें।



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Maghi Purnima/Magha Purnima 9th February 2020; Puja Vrat Vidhi, Snan Daan, Shubh Muhurat and And Significance


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