शादी के बुरे दौर से निपटने के लिए मनी मैनेजमेंट सही न होने पर हो सकती हैं मुश्किलें
यूटिलिटी डेस्क. बात कड़वी है, लेकिन सच है। संयुक्त राष्ट्र की हाल ही में आई रिपोर्ट बताती है कि पिछले दो दशकों में तलाकशुदा लोगों की संख्या दोगुनी हो गई है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि पिछले दशक में महिलाओं के अधिकारों में बढोतरी हुई है, लेकिन मानव अधिकारों का उल्लंघन और लैंगिक असमानता अब भी देखी जाती है। यूं तो हम यही चाहेंगे कि किसी के जीवन में तलाक जैसी स्थिति न आए, लेकिन आज के जमाने में हर स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है। दुर्भाग्य से अगर तलाक होता है तो एक महिला को खुद ही पैसों का प्रबंधन करना पड़ता है। यहां ऐसी ही स्थिति के लिए छोटी गाइड दी जा रही है।
सबसे पहले बीमा
अगर आपके बच्चे हैं तो सबसे पहले जीवन से जुड़े जोखिमों और स्वास्थ्य के जोखिमों से खुद की सुरक्षा जरूरी है। इसके लिए लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस कवर लें। टर्म प्लान लें, जो कम कीमत पर लाइफ कवर देता है। इसके बाद फ्लोटर हेल्थ प्लान लें, जिसमें आप पर निर्भर सभी लोग कवर हों। बाद में सभी के लिए अलग-अलग हेल्थ प्लान भी ले सकती हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी होने पर इंश्योरेंस कवर को गंभीर बीमारी और एक्सीडेंट इंश्योरेंस प्लान वाला भी बना सकती हैं। इससे सुनिश्चित होगा कि आप पर निर्भर लोग खासतौर पर बच्चे बुरी स्थिति से प्रभावित नहीं हों।
नियमित आय की व्यवस्था
इसकी शुरुआत बचत या एलीमॉनी (संभरण) के पैसों को मासिक आय में बदलने से कर सकती हैं। आप पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम में निवेश से शुरुआत कर सकती हैं। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे मंथली पेआउट विकल्प भी अपना सकती हैं। बाद में पैसों या बचत का कुछ हिस्सा म्यूचुअल फंड्स द्वारा दिए जाने वाले ऐसे मंथली इनकम प्लान्स (एमआईपी) में भी निवेश कर सकती हैं, जिनका अच्छा डिविडेंड रिकॉर्ड हो। ये नियमित आय के विकल्प नौकरी के वेतन के साथ अच्छी वित्तीय स्थिति में ला सकते हैं।
बच्चे के भविष्य के लिए
बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे खर्चों के लिए भी पैसा जोड़ना जरूरी है। इसके लिए सुनिश्चित करना होगा कि निवेश तेजी से बढ़े। इक्विटी में निवेश में ज्यादा ग्रोथ मिलती है। अगर आपके लक्ष्य के लिए 8-10 साल ही बचे हैं तो इंडेक्स फंड में एसआईपी के माध्यम से हर महीने निवेश की शुरुआत कर सकती हैं। इससे लंबी अवधि में लाभ की संभावना रहती है। इंडेक्स फंड को समझने के बाद आप लार्ज-कैप इक्विटी फंड्स में भी एसआईपी कर सकती हैं। हालांकि इस पर नजर रखनी होगी कि समय के साथ म्यूचुअल फंड कैसा परफॉर्म कर रहे हैं। इक्विटी फंड को सपोर्ट करने लिए पब्लिक प्रॉवीडेंट फंड (पीपीएफ) में भी निवेश कर सकती हैं। पीपीएफ अकाउंट बच्चे के नाम पर खोल सकती हैं। इससे पहले साल से ही एक निश्चित मिनिमम ग्रोथ सुनिश्चित की जा सकेगी।
रिटायरमेंट और घर की प्लानिंग
जैसी योजना बच्चे की शिक्षा के लक्ष्य के लिए बताई गई है, वैसी ही रिटायरमेंट के लिए भी लागू की जा सकती है। यानी अपने नाम पर पीपीएफ एकाउंट (बच्चे के पीपीएफ एकाउंट के अलावा) के साथ पहले इंडेक्स फंड्स में और फिर लार्ज-कैप इक्विटी फंड्स में निवेश, जिनका अच्छा रिटर्न देना का रिकॉर्ड रहा हो। घर बनाना भी लॉन्ग टर्म गोल हो सकता है। इसके लिए भी इसी तरह निवेश के विभिन्न माध्यम अपनाकर वित्तीय योजना बना सकती हैं। योजनाएं बनाने में किसी वित्तीय सलाहकार की मदद भी ले सकती हैं।
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