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पीपीएफ सहित छोटी बचत योजनाओं में घट सकती हैं ब्याज की दरें, सरकार ने दिए संकेत

यूटिलिटी डेस्क. आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती ने अगली तिमाही में स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में बदलाव के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि इसे बाजार दरों के अनुरूप संतुलित बनाया जा सकता है। इससे पॉलिसी रेट्स के लाभ को तेजी से आम लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। बैंक डिपॉजिट रेट्स में नरमी के बावजूद चालू तिमाही में सरकार ने पीपीएफ और राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) समेत लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती करने से दूरी बनाए रखी।

वर्तमान में लगभग 12 लाख करोड़ रुपए लघु बचत योजनाएं

चक्रवर्ती ने कहा, ‘देश में हमारे पास वर्तमान में लगभग 12 लाख करोड़ रुपए लघु बचत योजनाओं में और करीब 114 लाख करोड़ रुपए बैंक जमा के रूप में हैं। इससे बैंकों की देनदारी इन 12 लाख करोड़ रुपए से प्रभावित हो रही है।’ उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल वैसी स्थिति है जब कोई कमजोर इंसान किसी ज्यादा शक्तिशाली व्यक्ति को नियंत्रित करने लगे। कमोबेश छोटी बचतों की ब्याज दर का कुछ जुड़ा बाजार दरों से होना चाहिए जो बड़े स्तर पर सरकारी प्रतिभूतियों से प्रभावित होती हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि श्यामला गोपीनाथ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया है।


बाजार से अतिरिक्त पैसा नहीं उठाएगी सरकार
वित्तीय घाटे का लक्ष्य बढ़ाने की स्थिति में सरकार के बाजार से अतिरिक्त धन जुटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस साल सरकार बाजार से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं उठाएगी और ना ही सरकार की घाटे का मौद्रीकरण करने की कोई योजना है। उल्लेखनीय है कि राजस्व संग्रह में कमी के चलते सरकार ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.8 प्रतिशत होने का अनुमान जताया है। यह बजट अनुमान 3.3 प्रतिशत से अधिक है।


छोटी बचत योजनाओं पर अभी कोई खतरा नहीं
एक साल की मैच्योरिटी के लिए बैंकों का डिपॉजिट रेट और स्मॉल सेविंग्स के लिए दरों में करीब एक फीसदी का अंतर है। उन्होंने कहा कि भले सरकार स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर निर्भर नहीं है, लेकिन सरकार का इन योजनाओं को खत्म करने का कोई इरादा नहीं है क्योंकि लोग इसका इस्तेमाल करते हैं।



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