जैसी परिस्थिति है, उसे ठीक समझें और उसके अनुकूल खुद को ढाल लेने से सुख बना रहता है
> संत की बात सुनकर व्यक्ति खुश हो गया, क्योंकि उसे सुबह-शाम ताजा दूध मिलेगा। व्यक्ति ने गाय की देखभाल शुरू कर दी, कुछ ही दिनों में वह तंदुरुस्त हो गया। उसने संत से कहा कि गुरुदेव अब बहुत आनंद है। मैं गाय की देखभाल करता हूं, मस्त रहता हूं। गुरु ने कहा कि ठीक है।
> एक दिन गाय आश्रम से कहीं चली गई। बहुत खोजने के बाद भी शिष्य को गाय नहीं मिली। गाय न मिलने की वजह से वह शिष्य दुखी हो गया। उसने अपने गुरु को इस बात की जानकारी दी। गुरु ने कहा कि यह भी ठीक है।
> कुछ दिनों के बाद शिष्य को गाय फिर मिल गई। शिष्य खुश हो गया। उसने गुरु को बताया कि गाय मिल गई है। गुरु ने कहा है कि यह भी ठीक है।
> शिष्य ये सुनकर हैरान हो गया। उसने गुरु से कहा कि गुरुदेव जब मैंने आपको बताया था कि गाय के दूध सेवन से मैं आनंद में हूं, तब आपने कहा था ठीक है। इसके बाद जब गाय गुम हो गई, तब भी आपने कहा था कि यह भी ठीक है और जब गाय मिल गई है, तब भी आप यही कह रहे हैं कि ठीक है। ऐसा क्यों?
> गुरु ने शिष्य से कहा कि यही जीवन को जीने का सही तरीका है। हमारे जीवन में जैसी परिस्थितियां, हमें उन्हें ठीक समझना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार खुद ढाल लेना चाहिए। यही सुखी जीवन का मूल मंत्र है।
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