दुनिया में अभी 2420 तरह की क्रिप्टोकरेंसी प्रचलन में मौजूद, यह किसी भी बैंक से जुड़ी नही होतीं
यूटिलिटी डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक के दो साल पुराने सर्कुलर को रद्द करते हुए क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग की इजाजत दे दी। इंटरनेट और स्मार्टफोन के जमाने में पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी का चलन बढ़ा है। आइए जान लेते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी क्या होती है और यह कैसे काम करती है।
डिजिटल करेंसी का एक रूप है क्रिप्टोकरेंसी
यह डिजिटल करेंसी होती है और किसी भी सरकार या किसी भी बैंक से जुड़ी हुई नहीं है। एक यूजर दूसरे को क्रिप्टोकरेंसी भेजता है तो इसका रिकॉर्ड एन्क्रिप्शन के जरिए यानी सांकेतिक भाषा में होता है। इसे कोई अन्य डिकोड नहीं कर सकता है। इसलिए इसे क्रिप्टोकरेंसी कहते हैं।
कंप्यूटर सीपीयू से होती है बिटक्वाइन माइनिंग
बिटक्वाइन ट्रांजेक्शन के डेटा को मेंटेन करने के लिए कंप्यूटर के सीपीयू की पावर इस्तेमाल होती है। सीपीयू में बिटक्वाइन से जुड़ा सॉफ्टवेयर इन्सटॉल किया जाता है। यह सॉफ्टवेयर कॉम्प्लेक्स गणितीय गणना कर बिटक्वाइन के लिए इनक्रिप्शन तैयार करता है। माइनिंग का काम हाई एंड सीपीयू के जरिए कोई भी कर सकता है।
मौजूदा समय में सबसे आगे है बिटक्वाइन
बिटक्वाइन इस समय सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। बिटक्वाइन का रिकॉर्ड पब्लिक लेजर में मेंटेन होता है। 2009 से अब तक सभी ट्रांजेक्शन पब्लिक लेजर में सेव होते रहे हैं। ट्रांजेक्शन के सभी रिकॉर्ड कई ब्लॉक में रखे जाते हैं। इसलिए ये ब्लॉकचेन भी कहलाते हैं।
बिटक्वाइन में इस साल 50% तक की तेजी
बिटक्वाइन में इस साल 50% तेजी आ चुकी है। अक्टूबर 2019 के बाद पहली बार बिटक्वाइन पिछले दिनों 10,000 डॉलर पर पहुंचा था। मौजूदा वैल्यू 8,771 डॉलर (6.40 लाख रुपए) है। दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में भी इस साल तेजी बनी हुई है। इथेरियम की वैल्यू दोगुनी हुई है।
बिटक्वाइन की इतनी वैल्यू क्यों हो गई
जापान ने बिटक्वाइन को कानूनी रूप दिया। इसके बाद से इसकी वैल्यू 60% से ज्यादा बढ़ गई।
ट्रांजेक्शन के लिए यह काफी सुरक्षित माना जाता है। साथ ही इस पर किसी अथॉरिटी का नियंत्रण न होने के कारण इसमें हाइपर इनफ्लेशन का खतरा नहीं होता है।
रेगुलेशन न होने की वजह से ट्रांजेक्शन की लागत काफी कम।
वोलाटैलिटी अधिक होने से उतार-चढ़ाव बहुत
अब भी कई लोग बिट क्वाइन या डिजिटल करेंसी के बारे में कुछ पता नहीं है। इसमें वोलाटैलिटी यानी उतार-चढ़ाव ज्यादा है। बिटक्वाइन की अभी एक लिमिट है। मौजूदा स्ट्रक्चर के मुताबिक संख्या में 2.1 करोड़ से ज्यादा बिट क्वाइन नहीं हो सकते हैं।
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