मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए अगर आपके पास नही हैं सेविंग्स, तो गोल्ड लोन सहित 4 तरह से जुटा सकते हैं फंड
यूटिलिटी डेस्क. देश में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इस बीमारी से निपटने के लिए काफी पैसों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगर आपने हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा है तक आपको आर्थिक रूप से ज्यादा फिक्र करने की जरूरत नहीं है। वहीं अगर आपने हेल्थ इंश्योरेंस नहीं ले रखा है तो क्या आपके पास इतनी सेविंग्स है कि आप किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से निपट सकते हैं? अगर इसका जवाब नहीं है तो हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिनके जरिए आप फंड जुटा सकते हैं।
गोल्ड लोन
गोल्ड लोन पाने के लिए आपको अपने गोल्ड को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन (NBFC) या बैंक में देना होगा। बैंक उसकी वैल्यू निकालेंगे। फिर उस वैल्यू का 75 फीसदी तक लोन लिया जा सकता है। नियमित रूप से इसकी ब्याज भरनी होती है। इसकी EMI भी सरल होती है। आपके पास रकम एकत्र होने पर इसे कभी निकाल सकते हैं। इसकी ब्याज दर भी पर्सनल लोन से कम होती हैं।
इनवेस्टमेंट पर लोन
अगर आपके पास LIC की पॉलिसी है और अचानक आपको पैसे की जरूरत पड़ती है तो आप भारतीय जीवन बीमा निगम से लोन ले सकते हैं। आप लोन के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं, जिससे आपको आसानी से लोन मिल जाता है। इतना ही नहीं, आप चाहें तो लोन की ईएमआई भी चुकाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पॉलिसी की मैच्योरिटी पर लोन लिए पैसे को काट लिया जाता है। यह लोन आपकी पॉलिसी के सरेंडर वैल्यू का 90 फीसदी तक ही मिल सकता है। हालांकि LIC यूलिप या टर्म लाइफ इन्श्योरेंस पर लोन नहीं देती है। इसके अलावा अगर आपने फिक्सड डिपॉजिट में निवेश कर रखा है तो आपको उस पर भी लोन आसानी से मिल जाएगा। आमतौर पर बैंक फिक्सड डिपॉजिट का 75 प्रतिशत तक का लोन देते हैं।
पर्सनल लोन
इमरजेंसी के समय पर्सनल लोन भी एक विकल्प हो सकता है। इसमें लोन राशि और ब्याज दर आपकी आय, ऋण, री-पेमेंट क्षमता जैसी बातों पर निर्भर करती है। इसके तहत 10 से लेकर 21 प्रतिशत की दर पर लोन मिलता है। एसबीआई 10.55 से 16.55% तक की ब्याज दर पर लोन देता है।
प्रोपर्टीलोन
अगर आपके पास मकान, दुकान या जमीन है तो आप उसको बैंक में गिरवी रखकर भी लोन ले सकते हैं। अधिकांश कर्जदाता आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू का 50 से 60 फीसदी तक ही लोन देते हैं। कुछ कर्जदाता ओवरड्राफ्ट सुविधा भी देते हैं। इसके तहत आपको केवल इस्तेमाल किए गए धन का ही भुगतान करना होगा। प्रॉपर्टी लोन लेते समय ब्याज दर के बजाए प्रीपेमेंट, फोरक्लोजर फीस, प्रोसेसिंग फीस, देरी से भुगतान पर लगने वाले चार्जेस पर फोकस करें। यदि प्रीपेमेंट, फोरक्लोजर फीस, प्रोसेसिंग फीस, देरी से भुगतान पर लगने वाले चार्ज ज्यादा हैं तो इससे आप पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसके तहत 10 से लेकर 15% तक की ब्याज दर पर लोन मिलता है।
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