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फाल्गुन पूर्णिमा से पहले एकादशी पर भी करें विष्णुजी की पूजा, लक्ष्मी मंत्र का जाप करें

जीवन मंत्र डेस्क. शुक्रवार, 6 मार्च की सुबह फाल्गुन मास की एकादशी और शाम को द्वादशी तिथि रहेगी। इस एकादशी को आमलकी एकादशी और द्वादशी को गोविंद द्वादशी कहा जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली से पहले इस एकादशी पर भी विष्णुजी और लक्ष्मीजी की विशेष पूजा करनी चाहिए। गोविंद द्वादशी पर किसी गोशाला में धन का दान करना चाहिए। यहां जानिए इस शुभ योग में और कौन-कौन से पुण्य कर्म किए जा सकते हैं...

> एकादशी पर किसी मंदिर जाएं और भगवान विष्णु के साथ ही महालक्ष्मी की भी पूजा करें। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से लक्ष्मी-विष्णु की प्रतिमा का अभिषेक करें। इसके लिए दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और इस दूध से अभिषेक करें। विष्णु मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय और लक्ष्मी मंत्र ऊँ महालक्ष्मयै नम: का जाप करें। दोनों मंत्रों का जाप अलग-अलग कम से कम 108 बार करें। पूजा के बाद भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें। ये पूजा किसी ब्राह्मण की मदद से भी करवा सकते हैं।

> एकादशी पर भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा करनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय गायों के लिए गोशाला में धन और हरी घास का दान करें। श्रीकृष्ण पूजा में गाय की छोटी सी प्रतिमा भी रखें। माखन-मिश्री का भोग लगाएं।

> इस तिथि को रंगभरी ग्यारस भी कहते हैं। इस दिन भगवान को प्राकृतिक रंग चढ़ाना चाहिए। प्राकृतिक रंग फूलों से बनाए जा सकते हैं।

> तुलसी के साथ ही भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम की पूजा भी करें। पूजा में तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।

> इस दिन अपने इष्टदेव का ध्यान करें और जरूरतमंद लोगों को धन का, अनाज का दान करें।



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