होली के रंगों से शरीर के अंदर उत्पन्न होती है सकारात्मक ऊर्जा
वसंत ऋतु आने से कहा जाता है वसंतोत्सव
होली पर्व वसंत ऋतु में मनाया जाता है। इसलिए इसे वसंतोत्सव भी कहा जाता है। ये पर्व ठंड के दिनों के अंत और गर्मियों की शुरुआत में मनाया जाता है। इसकी वजह ये है कि इन दिनों में होने वाले बदलावों के हिसाब से शरीर आसानी से खुद को ठाल ले। वसंत ऋतु में प्रकृति में सृजन होता है। इसलिए इन दिनों आमतौर पर मन प्रसन्न रहता है। इसलिए प्रकृति से जुड़ने के लिए ये पर्व मनाया जाता है और फूलों को पीसकर रंग बनाकर होली खेली जाती है।
नष्ट होते हैं वातावरण में मौजूद बैक्टेरिया
होली के समय मौसम में परिवर्तन के कारण में वातावरण में अधिक बैक्टेरिया जीवित होते हैं। जिनका प्रभाव हर मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। जब होलिका जलाई जाती हैं तब वातावरण का तापमान बढ़ जाता है और लोगों के आस–पास फैले बैक्टेरिया को नष्ट कर वातावरण को बिल्कुल शुद्ध कर देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शुद्ध गुलाल और अबीर का शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गुलाल त्वचा को उत्तेजित करते हैं और पोरों में समा जाते हैं। जो शरीर के आयन मंडल को मजबूती प्रदान करने के साथ सुंदरता में निखार लाते हैं।
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