सोमवार की रात जलेगी होली, होलिका के पास दीपक जलाने और परिक्रमा करने की है परंपरा
जीवन मंत्र डेस्क. सोमवार, 9 मार्च की रात होली दहन होगा। इस दिन से संबंधित कई परंपराएं प्रचलित हैं। होलिका के पास दीपक जलाने और परिक्रमा करने की परंपरा का पालन अधिकतर लोग करते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार होलिका दहन से पहले होली में अनाज डाला जाता है। होली के समय खेतों में नया अनाज पक जाता है। पुराने समय में फसल पकने की खुशी में ही होली की रात आग जलाकर उत्सव मनाया जाता है। यहां जानिए होली पर क्या करें और किन बातों से बचें...
पं. शर्मा के अनुसार होली की रात होलिका के पास और किसी मंदिर में दीपक जलाएं। होली दहन के समय परिवार के सभी सदस्यों को होलिका की तीन या सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय होलिका में चना, मटर, गेहूं, अलसी डालना चाहिए।
होलिका में कर्पूर भी डालना चाहिए। इससे होली जलते समय कर्पूर का धुआं वातावरण की पवित्रता बढ़ता है।
सोमवार को सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद किसी शिव मंदिर जाएं और भगवान के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें। अपने हाथों से गोबर के कंडे बनाएं और इन कंडों को होली में डालना चाहिए।
होली पर कौन-कौन से कामों से बचना चाहिए
होलिका दहन सोमवार को होगा और अगले दिन होली खेली जाएगी। इन दो दिनों में घर में क्लेश नहीं करना चाहिए। परिवार में प्रेम और शांति बनाए रखनी चाहिए। सपरिवार से हर्षोल्लास से ये पर्व मनाना चाहिए। क्रोध से बचें।
होली पर नशीली चीजों के सेवन बचना चाहिए। नशे की वजन से व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। ऐसी स्थिति में कई बार वाद-विवाद हो जाते हैं, जिससे परेशानियां बढ़ सकती हैं।
कभी भी घर और बाहर के वृद्ध लोगों का अनादर न करें। ध्यान रखें किसी भी परिस्थिति में माता-पिता या कोई अन्य बुजुर्ग हमारी वजह से उदास न हो। सभी का सम्मान करें। माता-पिता का आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करें।
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