सोने में निवेश करने का बना रहे हैं प्लान तो सॉवरेन गोल्ड बांड हो सकता है सही विकल्प, 20 अप्रैल से खरीद सकेंगे बांड
कोरोनावायरस के चलते बाजार में मंदी का दौर बना हुआ है ऐसे समय में लोग सोने में निवेश कर रहे हैं, इसी का नतीजा है कि सोना 46 हजार प्रति 10 ग्राम से भी महंगा हो गया है। ऐसे में अगर आप भी सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं तो सॉवरेन गोल्ड बांड आपके लिए सही विकल्प रहेगा। सरकार ने अगले 6 महीने में यानी 20 अप्रैल से लेकर 4 सितबंर तक 6 बार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bonds) जारी करने का फैसला किया है। टाइमलाइन के मुताबिक, बॉन्ड सितंबर तक 6 किस्तों में जारी किए जाएंगे। इन्हे बैंकों और बडे डाकघरों से खरीदा जा सकेगा। आइए यहां समझें कि क्या है सॉवरेन गोल्ड बांड और क्यों है यह निवेश का बेहतर विकल्प।
क्या है सॉवरेन गोल्ड बांड?
सॉवरेन गोल्ड बांड एक सरकारी बांड होता है। इसे डीमैट रूप में परिवर्तित कराया जा सकता है। इसका मूल्य रुपए या डॉलर में नहीं होता है, बल्कि सोने के वजन में होता है। यदि बांड पांच ग्राम सोने का है, तो पांच ग्राम सोने की जितनी कीमत होगी, उतनी ही बांड की कीमत होगी। इसे खरीदने के लिए सेबी के अधिकृत ब्रोकर को इश्यू प्राइस का भुगतान करना होता है। बांड को भुनाते वक्त पैसा निवेशक के खाते में जमा हो जाता है। यह बांड भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सरकार की ओर से जारी करता है।
जीएसटी या मेकिंग शुल्क नहीं
फिजिकल गोल्ड खरीदने पर आप सोने की कीमत तो चुकाते ही हैं, आप मेकिंग चार्ज भी चुकाते हैं। आप सोने की कीमत पर तीन फीसदी जीएसटी और मेकिंग चार्ज पर 5 फीसदी जीएसटी भी चुकाते हैं। इससे सोने की कीमत काफी बढ़ जाती है। सॉवरेन गोल्ड बांड में निवेश पर कोई जीएसटी नहीं लगता है। यह चूंकि बांड है इसलिए इस पर कोई मेकिंग चार्ज भी नहीं लगता।
ऑनलाइन आवेदन और भुगतान पर 50 रुपए प्रति ग्राम की छूट
सॉवरेन गोल्ड बांड के लिए ऑनलाइन आवेदन और भुगतान करने पर प्रति ग्राम सोने पर 50 रुपए की छूट पेश की गई है। यानी निवेश करते समय ही निवेशक को 50 रुपए का लाभ हो जाता है।
शुद्धता और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं
जब आप सोने की सिल्ली या सोने का आभूषण खरीदते हैं, तो आपको उसकी शुद्धता को लेकर संदेह हो सकता है। साथ ही उसे रखना भी सुरक्षित नहीं होता है। लेकिन सॉवरेन गोल्ड बांड में शुद्धता की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं होती है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के मुताबिक गोल्ड बांड की कीमत इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीरेए) द्वारा प्रकाशित 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने की कीमत से लिंक होती है। इसके साथ ही इसे डीमैट रूप में रखा जा सकता है, जो काफी सुरक्षित है और उस पर कोई खर्च भी नहीं होता है।
इश्यू प्राइस पर 2.50 फीसदी ब्याज मिलता है
सॉवरेन गोल्ड बांड में इश्यू प्राइस पर हर साल 2.50 फीसदी का निश्चित ब्याज मिलता है। यह पैसा हर 6 महीने में अपने आप आपने खाते में पहुंच जाता है।फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ पर आपको इस तरह का फायदा नहीं मिलता।
मैच्योरिटी पर कोई टैक्स नहीं, ब्याज पर टीडीएस नहीं
एनएसई के वेबइसाट पर दी गई जानकारी के अनुसार सॉवरेन गोल्ड बांड में निवेश का एक फायदा यह भी है कि 8 साल के मैच्योरिटी पीरियड के बाद इससे होने वाले लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता है। इसके साथ ही हर छह महीने पर मिलने वाले ब्याज पर कोई टीडीएस भी नहीं लगता।
1 ग्राम से 4 किलो तक खरीद सकते हैं सोना
कोई शख्स एक वित्त वर्ष में मिनिमम 1 ग्राम और मैक्सिमम 4 किलोग्राम तक वैल्यू का बॉन्ड खरीद सकता है। हालांकि किसी ट्र्स्ट के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किग्रा है। कोई भी व्यक्ति एक फिस्कल ईयर में 500 ग्राम सोने के बॉन्ड खरीद सकता है। बॉन्ड का मेच्योरिटी पीरियड 8 साल का है। लेकिन निवेशकों को 5 साल के बाद बाहर निकलने का मौका मिलता है। यानी अगर आप निकालना चाहते हैं तो 5 साल के बाद निकाल सकते हैं।
अन्य लाभ
एनएसई के मुताबिक लोनलेने के दौरान कॉलैटरल के रूप में भी इन सॉवरेन गोल्ड बांड का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा ये बांड एनएसई पर ट्रेड भी करते हैं।
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