26 अप्रैल को अक्षय तृतीया, घर की सुख-समृद्धि के लिए क्या करें और क्या न करें
रविवार, 26 अप्रैल को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया है। इसे अक्षय तृतीया और आखा तीज कहा जाता है। इस दिन किए गए दान का अक्षय यानी कभी नष्ट न होने वाला पुण्य फल मिलता है। इस तिथि का महत्व काफी अधिक है, क्योंकि ये साल के 4 अबूझ मुहूर्तों में से एक है। देवउठनी एकादशी, वसंत पंचमी और भड़ली नवमी के साथ ही अक्षय तृतीया को भी अबूझ मुहूर्त माना गया है।
परशुराम की जन्म तिथि
वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, क्योंकि इस तिथि पर अष्ट चिरंजीवियों में से एक परशुराम का जन्म हुआ था। भगवान विष्णु के नर-नरायण, हयग्रीव अवतार भी इसी तिथि पर हुए थे। त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी शुभ तिथि से मानी जाती है। इस दिन विष्णुजी के साथ महालक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए।
इस तिथि पर दान जरूर करना चाहिए
अक्षय तृतीया पर किए गए दान का अक्षय पुण्य मिलता है। इस दिन जौ, गेहूं, चना, दही, चावल, फलों का रस, दूध से बनी मिठाई, सोना और जल से भरा कलश, अनाज आदि चीजों का दान करना चाहिए। अभी गर्मी का समय है, ऐसे में छाता और जूते-चप्पल का दान भी करना चाहिए। अक्षय पर पितरों के लिए विशेष पूजा-पाठ करनी चाहिए।
अक्षय तृतीया पर कौन-कौन से काम न करें
अक्षय तृतीया पर घर में क्लेश नहीं करना चाहिए। इस दिन घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। वाद-विवाद से बचें। नशा न करें। धर्म के अनुसार कर्म करें। अधार्मिक कर्म करने वाले लोगों को अक्षय तृतीया पर किए गए दान-पुण्य का पूरा फल नहीं मिल पाता है।
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