तेलंगाना में एक महीने का उत्सव, दक्षिण भारत में कुछ जगह दीपावली के एक दिन पहले होता है हनुमान जन्मोत्सव
हनुमान जयंती पर्व स्थानीय मान्यताओं एवं कैलेण्डर के आधार पर देश में अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है। हनुमान जयंती उत्तर भारत में चैत्र माह की पूर्णिमा को यानी मार्च-अप्रैल में मनाया जाता है। यहां ये पर्व एक दिन का ही होता है। वहीं कुछ ग्रंथों और परंपराओं के कारण ये पर्व दक्षिण भारत में कृष्णपक्ष की चतुर्दशी यानी दीपावली से एक दिन पहले और मार्गशीर्ष माह में मनाया जाता है। उड़ीसा में ये पर्व वैशाख माह के पहले दिन मनाई जाती है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में ये महोत्सव के रूप में एक महीने से ज्यादा समय तक मनाया जाने वाला त्योहार है।
हनुमान जयंती पर मान्यता
- काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष डॉ कामेश्वर उपाध्याय के अनुसार मान्यताओं के आधार पर भगवान श्रीराम जन्म से पहले ही धरती पर हनुमान जी का प्राकट्य हो गया था। उन्होंने बताया परंपराओं के अनुसार कार्तिक माह के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को हनुमानजी का जन्म हुआ था। जो आज के समय मेंदीपावली के एक दिन पहले आता है।
- वहीं व्रत रत्नाकर ग्रंथ के अनुसार श्रीराम जन्म चैत्र माह के शुक्लपक्ष की नवमी को मनाया जाता है। उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में इसी दिन हनुमान जयंती पर्व मनाने की परंपरा है। ग्रंथों के अनुसार हनुमानजी का जन्म मंगलवार को स्वाती नक्षत्र के दौरान मेष लग्न में यानी शाम के समय हुआ था।
ऐसा क्यों
डॉ. उपाध्याय के अनुसार प्राचीन काल में हनुमानजी की पूजा शिव पंचायत (शिव,पार्वती, गणेश, कार्तिकेय एवं नंदी ) और राम पंचायत (श्रीराम,सीता और लक्षमण) के साथ होती थी। कुछ समय बीतने पर हनुमानजी को एकल देवता के रूप में अलग से पूजा जाने लगा। फिर हनुमानजी के मंदिर बनने लगे एवं जयंती पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई। तब देश में ये पर्व अलग-अलग ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार कहीं चैत्र, वैशाख, कार्तिक और मार्गशीर्ष महीने में मनाया जाने लगा।
उत्तर भारत
उत्तर भारत यानी दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र सहित कुछ और राज्यों में आमतौर पर हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा यानी मार्च-अप्रैल में ही मनाई जाती है। ये एक ही दिन का पर्व होता है। इस दिन हनुमान जी के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा की जाती है। दिनभर व्रत रखा जाता है। सुंदरकांड, हनुमान चालिसा और बजरंगबाण का पाठ किया जाता है। मंदिरों में हवन और भोजन प्रसादी का आयोजन भी किया जाता है।
आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना
यहां हनुमान जयन्ती को महोत्व रूप में मनाया जाता है। जो करीब 41 दिनों तक चलता है। ये उत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा से शुरू होता है और वैशाख माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दसवें दिन पूरा होता है। है। आन्ध्र प्रदेश में हनुमान भक्त चैत्र माह की पूर्णिमा पर 41 दिनों की दीक्षा लेते हैं और हनुमान जयन्ती के दिन इसका समापन होता है।
तमिलनाडु
तमिलनाडु में तमिल कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष अमावस्या को हनुमान जयन्ती पर्व मनाया जाता है। यहां इसे हनुमथ जयन्ती कहा जाता है। अंग्रेजी कैलेण्डर में तमिल हनुमान जयन्ती पर्व जनवरी या दिसम्बर महीने में मनाया जाता है। इस दिन हनुमानजी के साथ श्रीराम और माता सीता की भी पूजा की जाती है।
कर्नाटक
कर्नाटक में हनुमान जयंती पर्व एक दिन का ही होता है। लेकिन प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार ये पर्व 2 या 3 दिन तक भी मनाया जाता है। कर्नाटक में हनुमान जयंती को हनुमान व्रतम के नाम से जाना जाता है। ये पर्व मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को यानी दिसंबर और जनवरी मेें आता है।
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