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इस्टर संडे - मिल-बांटकर खाने से कम खाने में भी सभी को संतुष्टि मिल सकती है

12 अप्रैल को इस्टर संडे है। ये दिन ईसाई धर्म के लिए बहुत खास है। गुड फ्राइडे पर ईसा मसीह को सूली पर लटका दिया गया, इसी दिन उन्होंने मानवता की रक्षा के लिए शरीर त्यागा था। इसके बाद रविवार को वे फिर से जीवित हो गए थे। इसी वजह से इस दिन को इस्टर संडे के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसके बाद ईसा मसीह 40 दिनों तक जीवित रहे थे और अपने शिष्यों को उपदेश दिए थे। इस अवसर यहां जानिए ईसा मसीह से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग, जिसमें उन्होंने मिल-बांटकर खाने की बात कही है।

प्रचलित प्रसंग के अनुसार एक दिन ईसा मसीह अपने शिष्यों के साथ दूसरे गांव जा रहे थे। यात्रा की वजह से शिष्य थक चुके थे, उन्हें भूख लग रही थी। तब शिष्यों ने प्रभु यीशु से भूख लगने की बात कही। ईसा मसीह ने खाना खाने के लिए कहा तो शिष्यों ने देखा कि खाना बहुत कम है। तब प्रभु यीशु ने शिष्यों से कहा कि जो कुछ भी है, वह सब मिल-बांटकर खाओ।

सभी शिष्य एक बैठे और खाना शुरू करने ही वाले थे, तभी वहां एक भूखा व्यक्ति और पहुंच गया। उसने भी खाना मांगा तो ईसा मसीह ने उसे भी शिष्यों के साथ खाने के लिए बोला।

कुछ देर में सभी ने खाना खा लिया। कम खाने में भी सभी शिष्यों को संतुष्टि मिल गई, उनकी भूख शांत हो गई। सभी हैरान थे कि इतने कम खाने में सभी का पेट कैसे भर गया।

ये बात शिष्यों ने प्रभु यीशु से पूछी तो ईसा मसीह ने जवाब दिया कि जो लोग खुद से पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं, वे अभावों में भी संतुष्ट रहते हैं। तुम सभी ने खुद से ज्यादा दूसरों की भूख के बारे में सोचा, इसी वजह से थोड़ा सा खाना भी तुम लोगों के लिए पर्याप्त हो गया। इसीलिए हमें हर परिस्थिति में मिल-बांटकर ही खाना चाहिए।



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