शनिवार को एकादशी पर सूर्यास्त के बाद करें तुलसी की पूजा, दीपक जलाकर परिक्रमा करें
शनिवार, 4 अप्रैल को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे कामदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस तिथि पर भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा करें। एकादशी पर श्रीहरि के साथ ही तुलसी की पूजा करने की परंपरा है। भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाते समय तुलसी के पत्ते भी जरूर रखना चाहिए।
एकादशी की शाम तुलसी के दीपक जलाकर मंत्र जाप करना चाहिए। ध्यान रखें सूर्यास्त के बाद तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और स्पर्श भी नहीं करना चाहिए। तुलसी पूजा करते समय तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करना चाहिए...
तुलसी नामाष्टक मंत्र
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतनामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलभेत।।
ये है मंत्र जाप की सरल विधि
सूर्यास्त के बाद स्नान करें। इसके बाद तुलसी की पूजा करें। तुलसी को गंध, फूल, लाल वस्त्र अर्पित करें। फल का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं। तुलसी के सामने बैठकर तुलसी की माला से इस मंत्र का जाप करें। जाप की संख्या 108 होनी चाहिए।
इस मंत्र का भी कर सकते हैं जाप
तुलसी के पास बैठकर तुलसी की माला से तुलसी गायत्री मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।
ऊँ श्री तुलस्यै विद्महे। विष्णु प्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।
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