शनिवार को चतुर्थी व्रत, गणेशजी की पूजा तुलसी क्यों नहीं रखनी चाहिए?
शनिवार, 11 अप्रैल को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। इस तिथि पर गणेशजी की पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेशजी हैं। इसी तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। चतुर्थी पर गणेश पूजन करें और श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। पूजा में एक बात विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भगवान गणेश को तुलसी न चढ़ाएं। इस संबंध में एक तुलसी और गणेशजी से जुड़ी एक कथा प्रचलित है। जानिए ये कथा...
प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन समय तुलसी गणेशजी से विवाह करना चाहती थी। तुलसी ने गणपति से विवाह करने की प्रार्थना की, लेकिन गणेशजी ने विवाह करने से मना कर दिया।
गणेशजी के मना करने पर तुलसी क्रोधित हो गई। क्रोध में तुलसी ने गणेशजी को दो विवाह होने का शाप दे दिया।
इस शाप की वजह से गणेशजी भी क्रोधित हो गए और उन्होंने भी तुलसी को शाप देते हुए कहा कि तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा।
असुर से विवाह होने का शाप सुनकर तुलसी दुखी हो गई, उसने गणेशजी से अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगी। तब गणेशजी ने कहा तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण से होगा, लेकिन तुम भगवान विष्णु को प्रिय होने के साथ ही तुम्हारी पूजा भी होगी, लेकिन मेरी पूजा में तुलसी वर्जित रहेगी। इसी वजह से गणेशजी की पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है।
चतुर्थी पर ऐसे करें गणेश पूजा
चतुर्थी तिथि पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद घर के मंदिर में गणेशजी की पूजा करें। पूजा में भगवान को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। तिलक लगाएं। आभूषण चढ़ाएं। दूर्वा अर्पित करें। घर में बने मीठे व्यंजन का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाएं। आरती करें। परिक्रमा करें। ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को वितरीत करें।
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