देश, काल और परिस्थितियों को समझकर किसके साथ कैसा व्यवहार करना है, इसका सही निर्णय लें
रामायण में सुग्रीव और बाली का युद्ध हो रहा था। श्रीराम ने बालि को बाण मारा तो वह घायल होकर गिर पड़ा था। इस हालत में जब उसका पुत्र अंगद उसके पास आया तब बालि ने उसे ज्ञान की बातें बताई थीं। बालि ने अंगद से कहा-
देशकालौ भजस्वाद्य क्षममाण: प्रियाप्रिये। सुखदु:खसह: काले सुग्रीववशगो भव।।
बालि ने अंगद से कहा कि देश काल और परिस्थितियों को समझो। किसके साथ कब, कहां और कैसा व्यवहार करें, इसका सही निर्णय लेना चाहिए। पसंद-नापसंद, सुख-दु:ख को सहन करना चाहिए और क्षमाभाव के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए। बालि ने अंगद से ये भी कहा कि अब से सुग्रीव के साथ रहो।
जब बालि श्रीराम के बाण से घायल होकर गिर पड़ा, तब बालि ने श्रीराम से कहा- ‘आप धर्म की रक्षा करते हैं तो मुझे इस प्रकार बाण क्यों मारा?’
इस प्रश्न के जवाब में श्रीराम ने कहा- ‘छोटे भाई की पत्नी, बहिन, पुत्र की पत्नी और पुत्री, ये सब समान होती हैं और जो व्यक्ति इन्हें बुरी नजर से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता है। बालि, तूने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी पर बुरी नजर रखी और सुग्रीव को मारना चाहा। इस पाप के कारण तुझे बाण मारा है।‘
इस जवाब से बालि संतुष्ट हो गया और श्रीराम से अपने किए पापों की क्षमा याचना की। इसके बाद बालि ने अगंद को श्रीराम और सुग्रीव की सेवा में सौंप दिया। इसके बाद बालि ने प्राण त्याग दिए।
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