गुरुवार और पूर्णिमा का योग, भगवान सत्यनारायण की कथा करें और सुंदरकांड का पाठ करें
हिन्दी पंचांग के अनुसार गुरुवार, 7 मई को वैशाख मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इसके बाद 8 मई से ज्येष्ठ मास शुरू हो जाएगा। इस तिथि पर भगवान बुद्ध की जयंती भी मनाई जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर विशेष पूजा-पाठ अन्य धार्मिक कर्म करने की परंपरा है। यहां जानिए वैशाख पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं...
गुरुवार और पूर्णिमा के योग में भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा करें। पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा करने का विधान है। गुरुवार और पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा, व्रत-उपवास किया जाता है।
पूर्णिमा तिथि पर हनुमानजी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें। अगर संभव हो तो इस दिन सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं। हनुमान को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। किसी मंदिर में चोला चढ़ाने के लिए धन का दान भी कर सकते हैं।
पूर्णिमा तिथि पर किसी पवित्र नदी में स्नान करें और स्नान के बाद गरीबों को धन का दान करना चाहिए। अभी लॉकडाउन की वजह से नदी में स्नान करने से बचें। घर पर ही नदियों के नामों का जाप करें और स्नान करे। स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करें। अभी गर्मी का समय चल रहा है, इन दिनों में छाते का दान या पानी का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। किसी गरीब को चप्पल या जूते का दान भी कर सकते हैं।
पूर्णिमा पर घर में क्लेश न करें। जिन घरों में पति-पत्नी के बीच वाद-विवाद होता है, वहां नकारात्मकता का वास होता है। पूर्णिमा पर माता-पिता या किसी अन्य वृद्ध का अपमान करें। घर में साफ-सफाई रखें, गंदगी न होने दें।
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