एक्सपर्ट्स की सलाह- वर्चुअल योग क्लासेज के फायदे कम, नुकसान ज्यादा; अगर मजबूरी में कर रहे हैं तो 6 सावधानियां रखें
कोरोनावायरस के पहले तक भारत में करोड़ों लोग रोजानापार्कोंमें, छतों पर, मेडिटेशन सेंटर्स मेंयोग किया करते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलतेइनकी संख्या में कमी आ गई। ऐसे में घरों में कैदबहुत से लोगफिट रहने के लिए वर्चुअल क्लासेज का सहारा ले रहे हैं।
महाराष्ट्र के पुणे में योग टीचर और थैरेपिस्ट नीलकंठ मिश्रा बताते हैं किवे भी हालात के कारण कुछ वक्त से ऑनलाइन क्लासेज ले रहे हैं। नीलकंठ का कहना है कि लॉकडाउन के बाद वर्चुअल क्लासेज में इजाफा हुआ है।हालांकि, एक्स्पर्ट्स फेस टू फेस क्लासेज की तुलना में वर्चुअल योग को सही नहीं मानते हैं।
3 हफ्ते की चीज को सीखने में 3 महीने लग सकते हैं
गुजरात के अहमदाबाद में ज्ञानीश फिटनेस के फाउंडर और योग एक्सपर्ट ज्ञान आचार्य बताते हैं किऑनलाइन योग सीखने में काफी वक्त लगता है। उन्होंने कहा कि फेस टू फेस आप जो चीज 3 हफ्ते में सीख रहे हैं, उसेवर्चुअली सीखने में3 महीने लग जाएंगे।
वहीं, योग एक्सपर्ट और डाइटीशियन डॉक्टर शैलजा त्रिवेदी योग के लिए ऑनलाइन क्लासेज को सही ही नहीं मानती हैं। कहती हैं कि वर्चुअल क्लासेज सही नहीं है, योग के लिए तो बिल्कुल नहीं, क्योंकि योग करने से जितने फायदे होते हैं, गलत करने से उतने ही नुकसान हो सकते हैं।सामने सिखाने के दौरान हमें पता होता है कि व्यक्ति आसन ठीक से कर रहे हैं या नहीं, लेकिन ऑनलाइन में यह संभव नहीं हो पाता है।
वर्चुअल योग क्लासेज के दौरान6सावधानी रखें?






क्या कोरोना के बाद ऑनलाइन क्लासेज का दौर जारी रहेगा?
योग करने वालों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा होती है और 65 साल से ऊपर के लोगों को कोरोनावायरस का जोखिम ज्यादा होता है। ऐसे में कई फिटनेस प्रेमी लॉकडाउन के बाद भी सावधानी के तौर पर वर्चुअल क्लासेज का ही सहारा ले रहे हैं। नीलकंठ बताते हैं कि हालात सामान्य होने के बाद लोग वापस पार्क का रुख करेंगे, क्योंकि हम पहले से काफी ज्यादा ऑनलाइन हैं। ऑनलाइन रहने की भी अपनी बोरियत है और यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।
फायदे कम नुकसान ज्यादा
- आचार्य बताते हैं कि वर्चुअल क्लासेज में इंजुरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में जितना शरीर कंफर्टेबल हो उतना ही मूव करें।हो सकता है आप ऑनलाइन क्लासेज में किसी टीचर को नहीं जानते हों, इसलिए हो सकता है कि आपको सही गाइडेंस न मिल पाए।
- हालांकि, आचार्य यह भीबताते हैं कि इससे एक फायदा यह भी है कि आप वर्चुअली कहीं दूर बैठे किसी योग्य शिक्षक के संपर्क में भी आ सकते हैं। इससे आप पार्क में मौजूद भीड़ से भी बच सकेंगे।

बैगपैकर्स के लिए योगासन
- काफी लोग योग करना तो चाहते हैं, लेकिन अपने रूटीन के कारण जारी नहीं रख पाते हैं। डॉक्टर त्रिवेदी के अनुसार, योग को काम की तरह न लें उसे जीवन का अंग बना लें। अगर आप सफर में भीहैं तो कुछ योगासन हैं, जिन्हें आप कर सकते हैं।
पर्वतासन:
- सुखासन या पद्मासन में बैठें।
- दोनों हाथों को प्रणामासन में रखें।
- सिर पर रखें और सीधा करें।
- दृष्टि सामने रखें।
उत्तानमाण्डुकासन:
- वज्रआसन में बैठें।
- दोनों घुटनों को सामने से फैलाएं।
- दाहिने हाथ को मोड़ बाएं कंधे पर रखें।
- बाएं हाथ को मोड़कर दाहिने कंधे पर रखें।
- दृष्टि सामने रखें और श्वास सामान्य रखें।
अर्धचंद्रासन:
- दोनों पैरों में एक से डेढ़ फीट की दूरी रखें।
- दोनों हाथों को कमर पर रखें।
- उंगलियां आगे की ओर अंगूठे को पीछे रखें।
- सिर को धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाएं।
- दोनों कंधों को खींचकर पीछे करें।
- श्वास सामान्य रखें।
- धीरे से वापस आने के लिए सिर सीधा करें।
- कंधे सामान्य स्थिति में ले आएं।
ताड़ासन:
- सावधान की स्थिति में खड़े हो जाएं,दोनों पैर जुड़े हुए।
- दोनों हाथों को ऊपर की ओर कंधे तक उठाएं।
- हथेलियों को पलटें और हाथों को ऊपर उठाते हुए कान से सटाएं।
- पंजों पर खड़े हो जाएं।
- वापस आने के लिए पहले एड़ियां जमीन पर रखें।
- दोनों हाथों को कंधे की लाइन पर नीचे की तरफ लेकर आएं।
- हाथ नीचे कर दें।
तिर्यक ताड़ासन
- ताड़ासन में आएं।
- दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फीट की दूरी रखें।
- दोनों हाथों को आपस में जोड़ें।
- ऊपर की तरफ खींचकर दाहिनी ओर क्षमतानुसार झुकें,श्वास सामान्य रखें।
- धीरे से बीच में वापस आएं।
- ऐसा ही बाईं ओर करें।
- वापस आएं दोनों हाथों को कंधे की लाइन पर लाकर नीचे ले आएं।
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