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लिफ्ट-एस्केलेटर के अलावा फूड कोर्ट में भी दूसरों से 6 फीट की दूरी रखें, पूरे वक्त मास्क पहने रहें

लॉकडाउन केबाद सरकार ने लोगों के लिए कुछ रियायतें दी हैं। इसी के तहत देश के कई हिस्सों में8 जून से मॉल्स खुल गए हैं। हालांकि, कई लोग अभी भी घर से बाहर किसी भीड़-भाड़वाली जगह पर जाने से बच रहे हैं। सरकार ने भीसावधानी रखने के लिए गाइडलाइन जारी की है। कोरोना केबढ़ते हुए मामलों को देखते हुए हमें भी सतर्क रहना होगा। मॉल में अंदर जाने से लेकर बाहर आनेतक क्या सावधानियां रखें? किन बातों पर ध्यान दें? इसके लिए हमने एक्सपर्ट्स से बात की।

मॉल में जाएं तो क्यासावधानियां रखें?

  • सबसे पहले पार्किंग पर गौर करें

मॉल में पहुंचने पर हम सबसे पहलेपार्किंग में पहुंचते हैं। हालांकि, पार्किंग में काफी जगह होने के कारणसोशल डिस्टेंसिंग में मदद मिलती है, लेकिन यहां भी कर्मी मौजूद होते हैं, जो कई लोगों के संपर्क में आते हैं और गाड़ियां टच करते हैं।दिल्ली के मैक्स अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंटडॉ. आरएस मिश्राके मुताबिक,आपको इस बात काध्यान जरूर रखना चाहिए कि पार्किंग में मौजूदकर्मचारी बिना मास्क और ग्लव्जपहनेआपकी गाड़ी टच न करें।

  • मॉल में एंट्री के वक्त कैसे रहें सतर्क?

मॉल के अंदर जाने में भी कई जोखिम हैं,ऐसे में अपनी एक्टिविटीज और सर्फेस टच को लेकर अलर्ट रहें। सरकारी गाइडलाइन में भी यह स्पष्ट किया गया है कि गेस्ट, कर्मचारियों और सामान के लिए सेपरेट एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था होनी चाहिए।

सरोज सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डर्मिटोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव भारद्वाज कहते हैं कि जब भी आप मॉल में एंट्री करेंऔरकतार में लगे हों तो अपने आगे-पीछे के लोगों से कम से कम 6 फीट की दूरी जरूर रखें। कोरोना के खिलाफ यह बहुत जरूरी स्टेप है, जिसका खयाल हर वक्त रखा ही जाना चाहिए।

  • एस्केलेटर या लिफ्ट में क्या सावधानी रखें?

डॉ. भारद्वाज का कहना है कि इन जगहों पर एस्केलेटर और लिफ्ट में जल्दबाजी से बचना चाहिए। अपनी तरफ से पूरी तरह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए। कई मॉल्स में सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए एस्केलेटर, लिफ्ट में सर्किल बनाए गए हैं। इसके अलावा एक साथ कई लोगों को एस्केलेटर उपयोग करने की अनुमति नहीं है तो चढ़ने-उतरने में जल्दबाजी से बचें।

टॉयलेट में किन बातों का ध्यान रखें?

डॉ. मिश्रा कहते हैं कि हम एक साधारण सी बात को याद रखकर बड़ी परेशानी से बच सकते हैं। ऐसी फैमिली जिनके घरों में छोटे बच्चे हैं वे जब भी मॉल या थिएटर जाते हैं तो घर से ही बच्चों को पानी पिलाकर ले जाएं। कोशिश करें कि उसे मॉल में वॉशरूम न जाना पड़े।यह आदत अगले कुछ समय के लिए सभी को अपना लेनी चाहिए।

  • फूड कोर्ट में किन बातों का ध्यान रखें?

डॉ. भारद्वाज के मुताबिक, जहां भी भीड़भाड़ हो वहां सोशल डिस्टेंसिंग के नियम को ध्यान में रखना ही है। फूड कोर्ट में भी एक-दूसरे से कम से कम 6 फीट की दूरी मेंटेन करें। इसी तरह दो टेबल के बीच के डिस्टेंस का भी ध्यान रखें। डिस्टेंस प्रॉपर नहीं हो तो सटकर बैठने के बजाए एक टेबल छोड़कर बैठें।इसके अलावायदि बहुत जरूरी न हो तो, वहीं बैठकर खाने के बजाय घर लाकर खाना खाएं।

रिसर्चः 58%लोगों ने कहा- वे कोरोना के चलते मॉल्स नहीं जा रहे

  • कोरोना ने पूरी दुनिया में मॉल्स में बिजनेस को प्रभावित किया है। सिर्फ अमेरिका की ही बात करें तो वहां संक्रमण के डर से लोगों ने मॉल में जाना बहुत कम या लगभग बंद कर दिया है। इससे मॉल्स में बिजनेस बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
  • अमेरिका में कोरोनाफैलने की शुरूआत में रिटेल क्लाइंट्स की बिजनेस ग्रोथ के लिए काम करने वाली `कोरसाइट` संस्था ने मॉल और लोगों के बिहेवियर पर एक रिसर्च की थी। जिसमें 58% लोगों ने कहाकि वे पब्लिक प्लेसेस और मॉल्स में नहीं जाना चाहेंगे।
  • रिसर्च में 28% लोगों ने बताया कि वे मॉल्स में जाना पहले से ही बंद कर चुके हैं। अमेरिका में लोग इस बात पर भी एक राय दिखे कि कोराना संक्रमण खतरनाक स्तर पर पहुंचा तोवे मॉल जाना पूरी तरह बंद कर देंगे।भारतमें भी ऐसी ही स्थिति है।

ब्रॉन्ड्सकी मांग: मॉल मेंमाफ किया जाए 2-3 महीने का किराया

  • मॉल्स में बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हैं। इसके अलावा मॉल्स ऑनर्स और रिटेल ब्रॉन्ड्स के बीच किराए में माफी और नए सिरे से कॉन्ट्रेक्ट की शर्तें तय किए जाने को लेकर भी चर्चा चल रही है।ज्यादातर ब्रॉन्ड्स चाहते हैं कि उनका 2-3 महीने का किराया माफ किया जाए या शर्तें नए सिरे से तय की जाएं।

कस्टमर्स डर कोकैसे दूर करें?

  • लोगों के मन में फिलहाल मॉल्स या शॉप्स में जाने को लेकर कई तरह के डर बने हुए हैं। उन्हें भरोसा नहीं है कि इन जगहों पर उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजामकिए गए हैं। भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंस में सॉयकोलॉजी विभाग के प्रमुखडॉ. विनय मिश्रा ने बताया कि लोगों में असुरक्षा की भावना बहुत गहरी होती है। यह भावना कम या गलत जानकारी की वजह से पैदा होती है।
  • डॉक्टर विनय कहते हैं किइसे दूर करने के लिए लिखित चीजों से ज्यादा देखी हुई बातें प्रभावित करती हैं। जैसे- किसी दुकान के बाहर लिखा हो कि हम आपकी सेफ्टी का खयाल रखते हैं, यह बात लोगों को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि यदि दुकानदार लगातार अपने हाथ सैनिटाइज करता दिखेगा तो उसे भरोसा हो जाएगा।
  • डॉक्टर मिश्रा के मुताबिक,इसी तरह वह एक कस्टमर के साथ डीलिंग करने के बाद यदि अपने ग्लव्जडिस्पोजऑफ करता दिखाई देगा तो ग्राहक को पूरा विश्वास बढ़ेगा। उसे लगेगा कि यहां मेरी सेफ्टी का ध्यान रखा जा रहा है। यही बातें माउथ पब्लिसिटी से आगे बढ़ती हैं।


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