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बुधवार और एकादशी के योग में विष्णुजी के साथ ही गणेशजी की भी पूजा जरूर करें, सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं

बुधवार, 17 जून को योगिनी एकादशी है। इस एकादशी पर भगवान श्रीहरि की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। बुधवार के स्वामी गणेशजी माने गए हैं। इसीलिए बुधवार और एकादशी के योग में विष्णुजी के साथ ही भगवान गणपति की भी विशेष पूजा करें। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए इस एकादशी पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं...

एकादशी का महत्व

18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य नाम का अध्याय है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने सालभर की सभी एकादशियों का महत्व युधिष्ठिर को बताया है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस एकादशी पर व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए।

भगवान विष्णु की पूजा करें

एकादशी पर सबसे पहले गणेशजी की पूजा करें। इसके बाद भगवान विष्णु का लक्ष्मीजी के साथ पूजन करें। अभिषेक करें। पूजन में फल-फूल, गंगाजल, धूप दीप और प्रसाद आदि अर्पित करें। दिन में एक समय फलाहार करें। रात में भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं। मंत्रों का जाप करें। अगले दिन यानी 18 जून, द्वादशी तिथि पर किसी जरूरतमंद को दान-दक्षिणा दें।

ऐसे करें गणेश पूजा

गणेशजी को दूर्वा की 21 गांठ चढ़ाएं और श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें। गणेशजी की पूजा गजानंद के रूप में की जाती है। इसीलिए किसी हाथी को गन्ना खिलाएं। गणेशजी के साथ ही रिद्धि-सिद्धि की भी पूजा करें। इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

सूर्यास्त के बाद करें तुलसी पूजा

एकादशी पर भगवान विष्णु, महालक्ष्मी के अलावा तुलसी पूजा करने का भी विधान है। इस तिथि पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें इस दौरान तुलसी को स्पर्श नहीं करना चाहिए।



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