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वक्त की जरूरत डिजिटल शिष्टाचार; ऑफिस के लिए लैपटॉप, सोशल लाइफ के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करें; वीडियो कॉल और मैसेजिंग के दौरान ब्रेक लें

विक्टोरिया टर्क. कोरोनावायरस महामारी के बाद लोगों के डिजिटल बिहेवियर में काफी बदलाव आया है। टेक्नोलॉजी के साथ हमारी रिलेशनशिप एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। अब जब सब कुछ दोबारा शुरू हो चुका है, लेकिन हालात पहले जैसे या उससे बुरे ही हैं। ऐसे मेंहमेंकाफी हद तक टेक्नोलॉजी के भरोसे ही रहना होगा।ऐसे में हमारे लिए डिजिटल शिष्टाचार पहले से भी काफी जरूरी हो गए हैं। शिष्टाचार से हम बातचीत के दौरान गलतफहमी को दूर रख सकते हैं और अच्छे रिश्ते कायम कर सकते हैं। सबसे पहलीजो चीज हमें याद रखनी है, वो है अपने और दूसरे के प्रति सभ्य होना।

वीडियो कॉल के दौरान एहतियात

  • इस लॉकडाउन के दौरान हम सबसे ज्यादा वीडियो कॉल से परिचित हुए हैं। फिर चाहे जूम, स्काईप या गूगल हैंगाउट हो। कई वर्ग अपने पुराने क्षेत्र में वापस लौट रहे हैं, लेकिन कई दफ्तरकर्मियों की वापसी में अभीवक्त है। इसलिए वीडियो शिष्टाचार बनाए रखना बेहद जरूरी है।
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन की प्रोफेसर एना कॉक्स बताती हैं कि, जब हम समूह में होते हैं तो इशारों में बात कर लेतें हैं और दूसरे उसे समझ जाते हैं। लेकिन जब हम साथ नहीं होते तोहम इस तरह से जानकारी शेयर नहीं कर सकते हैं।
  • वीडियो पर यह कहना कठिन होता है किआपकी तरफ कोई देख रहा है या नहीं। इसे हटाने के लिए हाथ उठाने की प्रक्रिया करें। कॉल के लिए एजेंडा सेट करें, क्योंकि यह हमेशा अच्छा शिष्टाचार होता है। प्रोफेसर कॉक्स इस काम के लिए किसी को नियुक्त करने की सलाह देती हैं। इस कॉल लीडर का काम सबको बोलने का मौका देना होगा।
  • इसके अलावा वीडियो कॉल पर म्यूट बटन का इस्तेमाल भी समझदारी से करें। बड़े ग्रुप कॉल पर जब आप बात नहीं कर रहे हों, तब आपको माइक्रोफोन म्यूट करना चाहिए। लेकिन बोलते वक्त इसे फिर से दबाने का भी याद रखें।

काम के तरीके के बारे में सोचें

  • ऐसे में जब मीटिंग करना ज्यादा मुश्किल है, हमें पहले से ज्यादा मीटिंग करनी पड़ रही हैं। "ईट स्लीप वर्क रिपीट" के लेखक ब्रूस डैसली रिमोट वर्किंग के दौरान हमारे रोज काम करने के तरीके के प्रति चेता रहे हैं। ऑनलाइन प्रतिक्रिया के आधार पर प्रोडक्टिविटी को नापना सही नहीं है। बल्कि इससे काम कम होता है।
  • ब्रूस एक या दो घंटे का समय तय करने की सलाह देते हैं। जब सभी लोग मैसेज और कॉल का जवाब देने के लिए तैयार रहें। इसके अलावा वे काम के प्रति लचीला होने की बात भी करते हैं। 9 बजे से 5 बजे तक काम का आइडिया गैर जरूरी और गलत है। कई कर्मचारियों को घर में लोगों की देखभाल करनी पड़ रही है। इसके अलावा वे महामारी और लॉकडाउन के चलते मानसिक दबाव से भी गुजर रहे हैं। काम के समय के बाद ईमेल भेजना गलत होता है, लेकिन इन हालातों में यह सही है। यह ध्यान रखें कि आप तुरंत रिप्लाई न मांगें।
  • प्रोफेसर कॉक्स उम्मीद करती हैं किइन हालातों में हमें मिल रहा अनुभव लंबे समय तक काम करने के लिए और लचीला बनाने में मदद करेगा। हालांकि ब्रूस रिमोट वर्किंग को जबरन लागू करने के खिलाफ चेतावनी देते हैं। क्योंकि हो सकता है इससे कर्मचारियों को परेशानी हों।

दूर रहकर भी करीब रहें

  • आप लोगों से मिलने नहीं जा सकते, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप संपर्क में भी नहीं रह सकते। साइकोथेरेपिस्ट एरॉन बैलिक बताते हैं कि, हमें यह जानना बेहद जरूरी है कि हमने हमारे कुछ बहुत जरूरी खोया है। मुझे नहीं लगता कि तकनीक इसे तुरंत ठीक कर पाएगी।
  • डिजिटल प्लानिंग करने में बहुत ज्यादा प्लानिंग लगती है, जो काफी थकाने वाली होती। अगर आप लगातार वीडियो कॉल कर रहे हैं या मैसेजिंग कर रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप छोटे ब्रेक लेते रहें।
  • डॉक्टर बैलिक के अनुसार अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हो सकता है कि यह बातचीत आपको काम की तरह लगने लगे। प्रोफेसर कॉक्स बातचीत के हिसाब से डिवाइस का उपयोग करने की सलाह देती हैं। जैसे काम के कॉल के लिए लैपटॉप और सोशल लाइफ के लिए फोन।
  • डिवाइस पर ज्यादा समय बिताते वक्त इस चीज का ध्यान रखें किक्या देख रहे और क्या शेयर कर रहे हैं। सभी लोग परेशान हैं, ऐसे में आप अपनी मीडिया पोस्ट को लेकर और भी ज्यादा ध्यान रखना चाहेंगे। अगर कोई ह्यूमर वाली पोस्ट, जिसे आप सार्वजनिक शेयर नहीं करना चाहते तो उसे प्राइवेट चैट में भेजें।
  • डॉक्टर बैलिक ने कहते हैं किलॉकडाउन के अनुभव हमें तकनीक पर कम भरोसा करने की ओर ले जा रहा है। ताकि हम रिलेशनशिप्स को लंबे वक्त तक चला सकें। पहले दरकिनार करने वाली मीटिंग्स के लिए अब हम परेशान हो रहे हैं।

कुल मिलाकर शायद तकनीक के साथ हमारे रिश्ते और सरल हो जाएंगे। प्रोफेसर कॉक्स को संदेह है कि जो लोग नए-नए डिजिटल टूल्स के संपर्क में आए हैं, वे कोरोनावायरस की पाबंदियों के हटने के बाद इन्हें फिर से छोड़ देंगे।



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Experts advise- use laptops for office work, use mobile for social life, be careful about social media posts


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